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अधरस्ते से तो अच्छे नजर आ रहे हैं मोदी के दिन

 

केंद्र में भारी भरकम बहुमत के साथ आई भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले दो साल पूरे करे लिए हैं। वह अपनी पाँच साल की यात्रा के लगभग आधे रस्ते या अधरस्ते पर है। वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार स्वामीनाथन ए अय्यर का मानना है कि यहाँ खड़े होकर देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिन अच्छे नज़र आ रहे हैं और फ़िलहाल तो उनके 2019 में फिर सरकार की बागडोर संभालने की अच्छी संभावना नज़र आती है।

अय्यर ने अंग्रेजी अख़बार इकनॉमिक टाइम्स के अपने आलेख में यह निष्कर्ष निकाला है। इसमें उन्होंने मोदी सरकार के पहले दो साल के काम का विश्लेषण किया है।

वे कहते हैं कि आर्थिक मोर्चे पर मोदी इतने उग्र सुधारक नहीं रहे जितनी उदारवादियों को उम्मीद थी। सामाजिक-राजनीतिक मोर्चे पर वे वैसे ‘सांप्रदायिक औघड़’ नहीं रहे जैसी उदारवादियों को आशंका थी। वे लोगों के लिए ‘अच्छे दिन’ दिन के वादे को पूरा नहीं कर पाए। फिर भी उन्होंने अब तक जो काम किया है वह उन्हें 2019 में एक बार फिर प्रधानमंत्री बनाने के लिए काफी है। भारत 7.7 प्रतिशत जीडीपी विकास दर के साथ दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था लग रही है। लेकिन वहीं निर्यात लगातार 19 महीने से घट रहा है और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक: IIP की वृद्धि दर लगभग शून्य है।

कुछ विशेषज्ञों ने आर्थिक मोर्चे पर आँकड़ों में गड़बड़ी या कमियों की आशंका जताई है। लेकिन सुझाए गए बदलावों के बाद समायोजित वृद्धि दर से भी भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में एक होगी। दिक्कत यह है कि यह अब भी सबके लिए अच्छे रोजगार की मोदी के आह्वान को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। यह सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लिए संपन्न जातियों के आंदोलन से परिलक्षित होता है। यहां गुजरात में हार्दिक पटेल के आंदोलन से समझा जा सकता है।

अय्यर के अनुसार मोदी ने कांग्रेस की अनेक योजनाओं को नये नाम: रिब्रांड के साथ जारी रखा है या बढ़ाया है जिनमें जनधन योजना, आधार व मोबाइल टेलीफ़नी की त्रयी तथा स्वच्छ भारत व डिजिटल इंडिया शामिल है। भूमि अधिग्रहण को लेकर ज़ोर-शोर से काम शुरू किया गया था लेकिन राजनीतिक बाधाओं के चलते इसे छोड़ना पड़ा। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि बड़े भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना रही है। निर्णय प्रक्रिया को प्रधानमंत्री कार्यालय, पीएमओ तक केंद्रित रखने का उनका उद्देश्य रिश्वतखोरी को समाप्त करना था। राज्यों में तथा नौकरशाही में निचले स्तर तक सिमट कर रह गया है। मोदी का ‘कोई पसंदीदा नहीं’  का सोच स्पष्ट दिखती है।

अय्यर ने गोमांस खाने वालों की हत्या, छात्र नेता कन्हैया कुमार जैसे विरोधियों को जेल में डालने और भारत माता की जय के नारे, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन को लेकर हुए विवादों का भी जिक्र किया है। लेकिन उनका कहना है कि ऐसा पहले भी होता रहा है। और तमाम कमियों और ‘अच्छे दिन’ नहीं ला पाने के बावजूद मोदी ने संभवत: इतना काम कर दिया है कि वे 2019 में एक बार जीत जाएँ भले ही तब उनके पास इतना भारी बहुमत नहीं हो।

एस अय्यर का पूरा आलेख यहां पढ़ें।

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Source - स्वामीनाथन ए अय्यर, इकनॉमिक टाइम्स