कहाँ चूक गई याहू!

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इंटरनेट कंपनी याहू बिक गई है। अमेरिकी कंपनी वेराइज़न ने उसे 4.8 अरब डालर में खरीदने का सौदा किया है जो कुछ ही महीने में सिरे चढ़ जाएगा। इसके साथ ही याहू का एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में 22 साल का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।

अखबार हिंदू ने याहू के बिकने पर एक संपादकीय लिखा है। इसमें याहू के इस तरह के बिकने को ‘एंटी क्लाइमेक्टिक’ बताते याद किया गया है कि किस तरह से याहू इंटरनेट की दुनिया में पहला कदम रखने वालों के लिए संपर्क का पहला ज़रिया बनी। इसके अनुसार 2001 में ‘डॉटकाम का बुलबुला फूटा तो’ अनेक इंटरनेट कंपनियां डूब गई लेकिन याहू कायम ही नहीं रही बल्कि बड़ी तेजी से फली फूली भी।

संपादकीय के अनुसार हालाँकि याहू इस फायदे को आगे कायम नहीं रख सकी और सर्च इंजिन की दुनिया में धमक के साथ आई गूगल से कभी मुकाबला नहीं कर सकी। रही सही कसर फेसबुक जैसी सोशल मीडिया कंपनियों ने पूरी कर दी। रोचक तो यह है कि याहू ने कभी गूगल और फेसबुक को खरीदने की सोची थी लेकिन आज वह इनके पासंग भी नहीं है। इंटरनेट की दुनिया में बहुत पानी बह चुका है और अब यह वैसी बिलकुल नहीं जैसी याहू की शुरुआत के समय थी। याहू 2012 में मरीसा मेयर को सीईओ बनाकर कुछ नया करने की सोची लेकिन वे भी इसकी दशा व दिशा में कोई बड़ा बदलाव नहीं ला सकीं।

संपादकीय के अनुसार तमाम गलतियों के बीच याहू ने एक अच्छा फ़ैसला 2005 में ई कॉमर्स कंपनी अलीबाबा में एक अरब डालर का निवेश कर किया। अलीबाबा आज एक दिग्गज और विशाल कंपनी है।

हिंदू का पूरा संपादकीय यहाँ पढ़ें।

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Source - संपादकीय, हिन्दू