दक्षिण एशिया का आधे से अधिक भूजल प्रदूषित

ground water
दक्षिण एशिया में आधे से ज्यादा भूमिगत जल दूषित है और इस्तेमाल करने लायक नहीं है। नेचर जियोसाइंस प्रकाशित एक अनुसंधान रपट में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इसके अनुसार सिंधु-गंगा घाटी के बड़े इलाके में भूमिगत जल खारेपन और संखिया से प्रभावित है और इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

द गार्डियन में प्रकाशित एक रपट के अनुसार सिंधु-गंगा बेसिन के भूमिगत जल में गिरावट बड़ा मुद्दा नहीं है। बड़ा मुद्दा इस भूमिगत जल का प्रदूषित होना है।

अध्ययन में लिखा गया है,’दो बड़ी चिंताएं इस पानी का खारापन व संखिया है।’

इस बेसिन में भूमिगत जल की गुणवत्ता का जिक्र करते हुए रपट में कहा गया है कि 650 फुट गहराई में जमा 23 प्रतिशत पानी कुछ ज्यादा ही खारा है जबकि 37 प्रतिशत विषाक्त सांद्रर्ता के हिसाब से ‘संखिया’ प्रभावित है।

दुनिया भर में निकाले जाने वाले भूमिगत जल की बात की जाए तो सिंधु-गंगा घाटी का हिस्सा लगभग एक तिहाई है। यह मीठा पानी जमीन के नीचे मिट्टी या चट्टानों के रिक्त स्थान में संग्रहीत है और यह नदियों व बारिश के पानी से आता है।

भूजल स्तर में गिरावट की चिंताओं के बावजूद इस बेसिन में हर साल एक से डेढ करोड़ कुंओं के जरिए जमीन का पानी खींचा जाता है।

यह नया अध्ययन भूजल स्तर के स्थानीय रिकार्ड व गुणवत्ता से जुड़े स्थानीय रिकार्ड पर आधारित है। ये आंकड़े 2000 से 2012 के बीच के हैं। इसमें पाया गया है कि लगभग 70 प्रतिशत जलवाही पर्तों, ऐक्विफर में जल-स्तर स्थिर है या बढ़ रहा है।

वहीं बाकी जिन 30 प्रतिशत जलवाही पर्तों में इसमें गिरावट आई है वे मुख्य रूप से घनी आबादी वाले इलाकों के आसपास की हैं।

पूरी रपट यहाँ पढ़ें।

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Source - गार्डियन एफ़पी