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दक्षिण एशिया में IS की दस्तक

 

बांग्लादेश में जुलाई में दो बड़े आतंकी हमले हुए। भारत सरकार के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन का मानना है कि ये दोनों आतंकी हमले इस बात का संकेत है कि इस्लामिक स्टेट यानी आईएस पड़ोस में कदम रख चुका है। उनका कहना है कि अब सयम आ गया है कि भारत इस खतरे की वास्तविकता को स्वीकार कर ले।

एम के नारायण ने अखबार हिंदू में इस विषय पर लेख लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि जुलाई महीने में बांग्लादेश में दो बड़े आतंकी हमले हुए। ये हमले उसकी पुष्टि हैं जिसका डर था। वह यह कि कट्टर इस्लामी व सलाफी तत्व दक्षिण एशिया में कदम रख चुके हैं। यहाँ IS—इस्लामिक स्टेट शब्द के इस्तेमाल की अनिच्छा दिखती है, बांग्लादेश की सरकार तो अनेक हमलों के बावजूद अब भी इसको लेकर नकार की स्थिति में है। हालांकि पड़ोसी देश भारत, शतुमुर्ग जैसा रवैया नहीं अपना सकता और उसे स्वीकार करना होगा कि बांग्लादेश के साथ साथ भारत, आईएस का बड़ा निशाना है। इसमें खुरासान, कश्मीर, गुजरात, पूर्वोत्तर भारत व वृहत् बंगाल :पश्चिम बंगाल व बांग्लादेश: प्रमुख हैं।

नारायणन ने अपने आलेख में भारत व बांग्लादेश में हुए विभिन्न आतंकवादी हमलों में समानता व विभिन्नता का जिक्र भी किया है। उन्होंने लिखा है कि एक जुलाई को ढाका की होली आर्टिसन बेकरी पर हमले और 26 नवंबर 2008 को मुंबई में आतंकी हमले की तुलना की जा रही है लेकिन उनमें समानताओं से कहीं अधिक भिन्नताएं हैं। 26 नवंबर 2008 के मुंबई हमले आईएसआई के समर्थन वाले लश्करे तैयबा के लोगों ने कई महीने के व्यापक ‘अभ्यास’ के बाद किए। यह भारत की वित्तीय राजधानी पर बहुत सोचा समझा हमला था। वहीं ढाका हमले में पूरी तरह IS की छाया दिखती है।

अपने आलेख में नारायण ने कहा है कि वास्तविक खतरा यह नहीं है कि IS इस इलाके में किसी स्तर पर हिंसक गतिविधियों में शामिल हो सकता है या उसकी क्षमता क्या है बल्कि वास्तविक खतरा तो मुस्लिम युवाओं म उसकी व्यापक अपील है। उन्होंने आगाह करते हुए कहा है कि भारत को दीवार पर लिखी इस चेतावनी को अच्छी तरह समझ व पढ़ लेना चाहिए और इसको लेकर गंभीर रूप से चिंतित होना चाहिए।

एम के नारायण का पूरा आलेख यहां पढ़ें।

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Source - एम के नारायणन, हिंदू