दीवारों पर लिखी मौत

A selfie from the Facebook page of social media celebrity Qandeel Baloch, who was strangled in what appeared to be an "honour killing," in Multan, Pakistan July 16, 2016. Qandeel Baloch/Facebook/via Reuters ATTENTION EDITORS - THIS IMAGE WAS PROVIDED BY A THIRD PARTY. EDITORIAL USE ONLY. NO RESALES. NO ARCHIVE. IT IS DISTRIBUTED, EXACTLY AS RECEIVED BY REUTERS, AS A SERVICE TO CLIENTS.

पाकिस्तान में कंदील बलोच की हत्या पर टिप्पणी करते हुए प्रख्यात लेखक मृणाल पांडे ने कहा है यह इस बात का एक और सबूत है कि उपमहाद्वीप में पारिवारिक मामलों में किस तरह से पुरुषों का दबदबा है। किस तरह पारिवारिक नियमों का निर्धारण, व्याख्या व फैसला पुरुष ही करते हैं।

मृणाल पांडे ने इंडियन एक्सप्रेस में छपे अपने एक लेख में कहा है कि कंदील बलोच की मौत के बाद गूगल पर उनके बारे में सर्च करने वाले हम लोग भी सोच रहे होंगे कि इतनी मुखर युवती इतने कट्टर व परंपरावादी माहौल में इतने दिन जी भी कैसे गई?

अपने लेख में पांडे ने इस महाद्वीप विशेषकर पाकिस्तान में महिलाओं की दुर्दशा का भी जिक्र किया है। एक एनजीओ ‘औरत फंड’ के 1914 के आंकड़ों के हवाले से उन्होंने बताया है कि पाकिस्तान में औसतन हर दिन छह महिलाएं अपह्रत होती हैं, चार की हत्या होती है, चार अन्य के साथ बलात्कार होता है और तीन महिलाएँ हर दिन आत्महत्या करती हैं। यह बहुत ही डरावने तथ्य हैं जो कि पाकिस्तान के पुरुषवादी समाज में महिलाओं की स्थिति को बहुत सटीकता से बयान करते हैं। ऐसे में यह कोई भी हैरानी कर सकता है कि अपने मुखर व बिंदास व्यवहार के कारण वास्तविक व सोशल मीडिया जैसी आभासी दुनिया में हलचल मचा देने वाली कंदील बलूच 26 साल तक ज़िंदा कैसे रह गई?

मृणाल ने अपने आलेख में ‘आॅनर बेस्ड वायलेंस अवेयरनेस नेटवर्क’ के आंकड़ों का भी ज़िक्र किया है। इसके अनुसार दुनिया भर में इस तरह की 5,000 हत्याएँ होती हैं। इनमें से 1000 महिलाओं, लड़कियों को भारत व पाकिस्तान में ही कथित इज्जत या शान के नाम पर मार दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र का एक आँकड़ा कहता है कि हर पाँच में से एक ‘आॅनर किलिंग’ भारत में होती है। गैर सरकारी संगठन तो इस आँकड़े को और भी अधिक बताते हैं।

अपने आलेख में मृणाल ने इस उपमहाद्वीप में महिलाओं के खिलाफ घर व बाहर होने वाले अपराधों को रेखांकित किया है और बताया है कि किस तरह सोशल मीडिया महिलाओं की खुद के प्रति राय और समाज की उसके प्रति राय को प्रभावित कर रहा है। लेकिन बात वही है कि कहीं खाप तो कहीं कथित मुल्लाओं की पाबंदियां… समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी कंदील बलूच के भाई की इस राय से सहमति रखता है कि ‘महिलाएँ तो होती ही घर की चारदीवारी में बंद रहने के लिए।’ और ऐसा वर्ग तो कंदील की मौत से खुश ही होगा।

मृणाल पांडे का पूरा लेख यहां पढ़ें।

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Source - मृणाल पांडे, हिन्दू