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जिन्हें नाज़ है जेहाद पर उनके बेटे कहां है?

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कश्मीर में पिछले 15 दिनों से जनजीवन ठप है। अलगाववादी बंद का आह्वान करते हैं, युवा कश्मीरियों के जत्थे पथराव करते हैं और सुरक्षा बल कर्फ़्यू लगाते रहते हैं। पिछली 9 जुलाई को हिज़्बुल कमांडर बुरहान वानी और उसके दो साथियों की सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत हो जाने के बाद से वादी-ए-कश्मीर में जून 2010 के पथराव आंदोलन जैसे हालात चल रहे हैं।

सड़कों पर पत्थरबाज़ी करते कश्मीरी युवाओं के जत्थे, आज के कश्मीर का एक दर्दनाक यथार्थ बन चुके हैं। अलगाववादी और पाकिस्तानी जिहादी संगठनों और नेताओं ने कश्मीरी युवाओं के मोहभंग को आज़ादी और भारत के ख़िलाफ़ जिहाद की लड़ाई की तरफ़ मोड़ दिया है।

कश्मीरी अलगाववादी नेता हाशिम क़ुरैशी अपनी कच्ची उम्र के दिनों से ही पाकिस्तान आते-जाते रहे हैं। वे 16 साल की उम्र में एक ट्रेनिंग कैंप से कश्मीर को आज़ादी दिलाने की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान गए थे। लेकिन अब उन की आँखें खुल चुकी हैं। उन्होंने आतंकवाद से किनारा कर लिया है और अपने अनुभवों को अपनी पुस्तक ‘अनवेलिंग द ट्रुथ’ या सच के अनावरण में साझा किया है।

ऑनलाइन पत्र क्विंट से बातचीत करते हुए वे कहते हैं “ज़ाहिर तौर पर आज़ाद कश्मीर की आज़ादी एक मज़ाक है।” उन्हें यकीन है कि पाकिस्तान कश्मीर के अविभाजित इतिहास और भूगोल की सारी यादें धो देना चाहता है। पाकिस्तान के इस उद्देश्य की चिंगारी को जला और भड़का रहे हैं कश्मीर के स्वयंभू नेता जो कश्मीरी युवाओं को झूठे प्रचार से बर्गला रहे हैं।” हाशिम कुरैशी के बेटे जुनैद की राय भी अपने पिता से जुदा नहीं हैं। ईटीवी नेटवर्क को दिए अपने इंटरव्यू में उसने इन तथाकथित नेताओं के झूठ और फ़रेब को बेनक़ाब किया है जिसके ज़रिए वादी में हिंसा फैलाई जा रही है। जुनैद पूछते हैं:

“कश्मीर की आज़ादी की पुकार लगाने वाले इन स्वयंभू नेताओं और आतंकवादियों सारे बच्चे विदेशों में लंदन, मलेशिया, पाकिस्तान या दुबई जैसी जगहों पर पढ़ते हैं। इनसे यह पूछने का वक़्त आ गया है कि अगर बंदूक की दुनाली इतनी ही पवित्र है, तो आप लोगों के बच्चे इसे क्यों नहीं उठाते?”

यह कोई सयोंग नहीं है की इन अलगाववादी नेताओ और आंतकवादियों के बच्चों ने किसी भारत विरोधी प्रदर्शन में एक पत्थर तक नहीं उठाया है, बन्दूक उठाने और आंतक का रास्ता चुन अपनी जान जोखिम में डालने की बात तो आप छोड़ ही दें। कभी आपने या फिर कश्मीर के उन युवाओं ने इस बारे में सोचा है की सय्यद सल्लाहुद्दीन या आसिया अंद्राबी के बच्चे क्यों नहीं सड़कों पर कभी नज़र आते। आज़ादी का नारा बुलंद करते, सुरक्षा बलों पर पथराव करते। ज़रा एक नज़र डालते हैं कि इन नेताओं और आंतकवादियों के बच्चे कहा हैं और क्या कर रहे हैं।

 

सलाहुद्दीन

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खूंखार आतंकी और यूनाइटेड जिहाद काउंसिल का अध्यक्ष सलाहुद्दीन पाकिस्तान के समर्थन से कश्मीर में लम्बे समय से सक्रिय है। सलाहुद्दीन के पाँच बेटे हैं, सभी कश्मीर में अमन चैन की ज़िन्दगी गुज़र रहे हैं।

  • सबसे बड़ा बेटा है शकील, श्रीनगर के एक अस्पताल में काम करता है
  • जावेद शिक्षा विभाग में कार्यरत है
  • शाहिद सिंचाई विभाग में है
  • वाहिद डॉक्टर है
  • और सबसे छोटा बेटा मजीद टेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन कर चूका है

 

सईद अली शाह गिलानी

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हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष सईद अली शाह गिलानी जो कश्मीरी नौजवानों को भड़काने और पाकिस्तान का समर्थन करने वालों में सबसे आगे रहते हैं, भारत के खिलाफ ज़हर उगलने का कोई मौका नहीं छोड़ते वह खुद सर्दियों में श्रीनगर नहीं दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में रहते हैं।

  • गिलानी के बड़े बेटे नईम और बहु रावलपिंडी पाकिस्तान में डॉक्टर हैं
  • दुसरे बेटे ज़हूर दिल्ली में रहते हैं
  • पौत्र इज़हार एक भारतीय प्राइवेट विमान कंपनी  में है
  • बेटी फ़रहत टीचर हैं और अपने इंजीनियर पति के साथ जेद्दाह में हैं

 

आसिया अंद्राबी

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आसिया अंद्राबी की शादी आशिक़ हुसैन फ़क्तू से हुई थी जो कश्मीर के सबसे बड़े आतंकवादी संगठन हिज़्बुल मुजाहिदीन का संस्थापक सदस्य था। अंद्राबी कश्मीर के महिला जिहादी नेटवर्क दुख़्तराने मिल्लत की मुखिया है और कश्मीर का एक जाना-माना नाम है। अंद्राबी पर आतंकी संगठन जमीयत-ए-हदीथ का गहरा असर है और वह उसी का प्रचार कश्मीर में करती है।

  • अंद्राबी का बड़ा बेटा, 22 वर्षीय मोहम्मद बिन क़ासिम सूचना प्रौद्योगिकी का छात्र है और उसकी बड़ी बहन के साथ मलेशिया में रहता है। वह यूनिवर्सिटी की क्रिकेट टीम का कैप्टन है
  • आंद्राबी का छोटा बेटा 15 वर्षीय मोहम्मद बिन क़ासिम श्रीनगर में पढ़ता है

आंद्राबी के ज़्यादातर रिश्तेदार पाकिस्तान, सऊदी अरब, इंगलैंड और मलेशिया जा चुके हैं। उसका एक भतीजा, ज़ुल्कारनैन पाकिस्तानी सेना में कप्तान है और दूसरा, इर्तियाज़-उन्-नबी इस्लामाबाद की इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी में एयरोनोटिकल इंजीनियर और लेक्चरर है।

 

मीरवाइज़ उमर फ़ारूख़

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मीरवाइज़ उमर फ़ारूख़ की बहन रबीना अमरीका में डॉक्टर है और बीवी शीबा मसूदी अमरीकी नागरिक है और उससे शादी की बदौलत कहा जाता है कि उमर के पास अमरीका का ग्रीन कार्ड है।

 

फ़रीदा बहनजी

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जम्मू कश्मीर मास मूवमेट (JKMM)  की अध्यक्षा फ़रीदा बहनजी का बेटा रूमा मक़बूल दक्षिण अफ़्रीका में डॉक्टर है।

 

मुहम्मद अशरफ़ सहराई

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एक और हुर्रियत नेता मुहम्मद अशरफ़ सहराई ने अपने बेटे आबिद को कम्प्यूट इंजीनीयरी की पढ़ाई करने दुबई भेज दिया है।

 

ग़ुलाम नबी सुमजी

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ग़ुलाम नबी सुमजी, को हुर्रियत का अनजाना हीरो और गीलानी का दाहिना बाजू माना जाता है। उनका बेटा जुगनू दिल्ली में रहकर मैनेजमैंट की पढ़ाई के लिए तैयारी कर रहा है।

 

अयाज़ अकबर

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हुर्रियत कांफ़रेंस के प्रवक्ता अयाज़ अकबर का बेटा सरवर याक़ूब भी पुणे में मैनेजमैंट की पढ़ाई कर रहा है।

 

मसर्रत आलम

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और उसके बाद नाम आता है पत्थरबाज़ों के हीरो, मुस्लिम लीग के चैयरमैन, अलगाववादी नेता मसर्रत आलम भट का जो हुर्रियत के गरम धड़े से हैं और गीलानी के उत्तराधिकारी माने जाते हैं। मसर्रत को भारत विरोधी प्रदर्शनों में पाकिस्तानी झंडे लहराने और पाकिस्तानी नारे लगाने का दोषी पाया जा चुका है। 2010 के उन प्रदर्शनों में घाटी में हुए पत्थरबाज़ी आंदोलन नें 112 लोग मारे गए थे।

  • मसर्रत आलम भट के दोनों बेटे श्रीनगर में पढ़ते हैं लेकिन उन्होंने कभी सड़कों प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं लिया

 

अब्दुल अज़ीज़ डार

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हुर्रियत के ही एक और नेता हैं अब्दुल अज़ीज़ डार, जिन्हें लोग जनरल मूसा कहकर बुलाते हैं। उनके दोनों बेटे उमर और आदिल पाकिस्तान में रहते हैं।

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Source - डॉ मीना शर्मा, देश की बात, Etv