ताजा समाचार

पूंजीवाद बनाम लोकतंत्र: उभरते तनाव

Martin -Wolf

क्या उदार लोकतंत्र व वैश्विक पूंजीवाद के बीच रिश्ता टिकाऊ है? पत्रकार संपादक मार्टिन वुल्फ़ ने इस सवाल को उठाते हुए कहा है कि पश्चिम भर के राजनीतिक घटनाक्रम ने इस सवाल की महत्ता को रेखांकित किया है। उन्होंने इन राजनीतिक घटनाक्रमों में अमरीका के राजनीतिक पटल की ओर इशारा करते हुए कहा है कि विशेषकर राष्ट्रपति पद के लिए एक अधिनायकवादी, लोकलुभावन हस्ती की उम्मीदवारी ने इस इस सवाल को रेखांकित किया है।

फाइनेंशियल टाइम्स में अपने आलेख में उन्होंने लिखा है कि उदार लोकतंत्र तथा पूंजीवाद में एक स्वाभाविक रिश्ता रहा है। यह है.. सामान, सेवा, पूंजी व श्रम की खरीदोफरोख्त का अधिकार। इनमें यह साझा विश्वास है कि लोगों को व्यक्तिगत रूप में तथा नागरिक के तौर पर अपने फै़सले करने चाहिए। लोकतंत्र तथा पूंजीवाद में यह सोच है कि लोग एजेंसी के रूप में काम करने के पात्र हैं। यानी मनुष्यों को सिर्फ अन्य लोगों के अधिकारों की वस्तु मात्र नहीं माना जाना चाहिए बल्कि उनके एजेंट के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने लिखा है कि इसके बाद भी लोकतंत्र व पूंजीवाद के बीच तनाव को आसानी से चिन्हित किया जा सकता है। कम से कम परिणाम के तौर पर तो पूंजीवाद समानतावादी है। अगर अर्थव्यवस्था लड़खड़ाती है तो ज्यादातर लोग अधिनायकवाद को चुन सकते हैं जैसा कि 1930 में हुआ। अगर आर्थिक परिणाम बहुत असमान होते हैं तो धनी लोग लोकतंत्र को धनिक तंत्र, प्लूटोक्रसी में बदल सकते हैं।

मार्टिन ने लिखा है कि ऐतिहासिक रूप से पूंजीवाद का उभार व व्यापक निर्वाचनाधिकार का दबाव साथ साथ चलता है। यही कारण है कि सबसे धनी देश उदार लोकतंत्र और कमोबेश पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाएँ हैं। वास्तविक आय में व्यापक भागीदारी वाली बढोतरी ने पूंजीवाद को वैधता तथा लोकतंत्र को स्थिरता देने में बड़ी भूमिका निभाई है। आज जहां पूंजीवाद के लिए संपन्नता में इस तरह की बढोतरी करना मुश्किल हो रहा है वहीं बढ़ती समानता व उत्पादकता वृद्धि में नरमी के संकेत हैं। यह जो ज़हरीला मिश्रण है इससे लोकतंत्र असहिष्णु और पूंजीवाद अवैध हो गया है।

मार्टिन वुल्फ का पूरा आलेख यहां पढ़ें।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटरपर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App

Source - मार्टिन वुल्फ़, फाइनेंशियल टाइम्स

बड़ी खबरें

1 September 2016