ताजा समाचार

ब्रेक्जिट: वैश्वीकरण की समाप्ति का संकेत

5746

ब्रिटेन में यूरोपीय संघ से अलग होने के पक्ष में वोट के बाद से ही वैश्वीकरण के अस्तित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लेखक और मोर्गन स्टेनली से जुड़े रुचिर शर्मा का कहना है कि वैश्वीकरण के युग का अवसान हो गया है और ब्रेक्जिट इसका अब तक का सबसे बड़ा संकेत है। उनका कहना है कि मुक्त बाजार व्यवस्था के खिलाफ बढ़ते विरोध को शायद ही रोका जा सके और हमें  ‘अवैश्वीकरण’ के दौर के लिए तैयार रहना चाहिए।

रुचिर शर्मा का यह आलेख गार्डियन अख़बार में छपा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि  यूरोपीय संघ को लेकर जनमत संग्रह के परिणाम से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। यानी अब जानकार यह सवाल कर रहे हैं कि इसके बाद कौन यानी, अब कौन देश यूरोपीय संघ से बाहर होगा और क्या बदलते घटनाक्रम से युद्ध बाद का यूरोपीय क्रम विखंडित हो जाएगा।

उन्होंने लिखा है कि ब्रेक्जिट का परिणाम आने के लगभग एक महीने बाद यह स्पष्ट है कि ब्रेक्जिट संकेत के बजाय प्रलय का कारण था। यह 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से खड़ी हुईं वैश्विक ताकतों का आविर्भाव है। इस संकट में नरम वृद्धि दर, बढ़ती असमानता तथा खुली सीमाओं या मुक्त व्यापार और मौजूदा नेताओें के खिलाफ गुस्सा शामिल है।

रुचिर शर्मा का कहना है कि ब्रिटेन में नयी प्रधानमंत्री टिरिज़ा मे के पदभार संभालने के साथ ही यूरोप के भीतर राजनीतिक भूकंप कमजोर पड़ रहा है क्योंकि मे, यूरोपीय संघ छोड़ना नहीं चाहती हैं। उन्होंने लिखा है कि ब्रेक्जिट भले ही, यूरोप या वैश्विक अर्थव्यवस्था में संकट की अगुवाई नहीं करे लेकिन यह इस बात का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण संकेत है कि वैश्वीकरण का युग समाप्त हो गया है, जैसा कि हम सब जानते हैं। ‘अवैश्वीकरण’ नया ‘बजवर्ड’ बनने जा रहा है।

रुचिर ने अपने आलेख में 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद दुनिया भर में राजनीतिक व आर्थिक घटनाओं के ज़रिए यह बताने की कोशिश की है कैसे लोग वैश्वीकरण के मूल विचार के खिलाफ हो रहे हैं और किस तरह से मौजूदा सरकारें या नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है।

रुचिर शर्मा का पूरा आलेख यहाँ पढ़ें।

 

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटरपर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App

Source - रुचिर शर्मा, द गार्डियन