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भारत का सकल घरेलू उत्पाद – सन 1000 से लेकर 2020 तक

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भारतीय अर्थव्यवस्था में बुलंदी की बात आजकल लगभग हर वैश्विक मंच पर हो रही है। कोई इसे वैश्विक वृद्धि का इंजिन बताता है तो कोई निवेश का सबसे आकर्षक गंतव्य। मधुरा कार्णिक ने क्वार्त्ज के एक लेख में इसी मुद्दे पर प्रकाश डालने की कोशिश की है।

उन्होंने लिखा है कि 300 साल पहले तक दुनिया की जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद में भारत का हिस्सा एक तिहाई से अधिक था। इस उपमहाद्वीप में अंग्रेजों का राज आने के बाद से यह हिस्सेदारी घटने लगी। हालांकि बीते कुछ वर्षों में, भारत की अर्थव्यवस्था फिर पटरी पर लौटती नजर आ रही है और एक रपट के अनुसार इसमें तेजी का यह क्रम बना रहेगा। एबरदीन अस्सेट मैनेजमेंट ने एक रपट ‘इंडिया: द जियांट अवेकंस’ में यह निष्कर्ष निकाला है। एबरडीन दुनिया में सबसे बड़ा कोष यानी फंड है। रपट के अनुसार यह फर्म भारत के परिदृश्य को लेकर बहुत उत्साहित है और उसका मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पूर्ण तेजी की ओर बढ रही है।

एबरडीन एशिया की एक रपट में कहा गया है,’भारत का उदय भले ही अप्रत्याशित दिख रहा हो लेकिन वास्तव में यह, उस जगह को फिर हासिल करने जा रहा है जो कि सदियों तक उसके पास रही। कम से कम 2000 साल तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी या दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था रही।’ यह रपट एबरडीन एशिया में वरिष्ठ निवेश प्रबंधक कैनेथ एकिंटेव ने लिखी है।

इसके अनुसार 17वीं शताब्दी में मुगल सम्राट अकबर की सालाना आय लगभग 1.75 करोड़ पौंड रही थी। उस समय वैश्विक जीडीपी में भारत का हिस्सा 25 प्रतिशत था जो कि कमोबेश 200 साल तक बना रहा। औपनिवेशिक काल में इसमें गिरावट आनी शुरू हुई जो कि 1970 तक जारी रही। लेकिन 1991 में जब भारत में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत हुई तो हालात बदलने लगे। उसके बाद से भारत का हिस्सा यानी वैश्विक अर्थव्यवस्था में भागीदारी लगातार बढ़ी है।

लेकिन एबरडीन अब भारत के लिए अच्छे दिनों की उम्मीद किस आधार पर कर रही है? जवाब है-नरेंद्र मोदी। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फंड का कहना है कि मोदी ने नियम पुस्तिका को फाड़ कर फेंक दिया और नये सिरे शुरुआत की है।

पूरी रपट यहाँ पढ़ें।

 

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Source - मधुरा कार्णिक, क्वार्त्ज