संकट में वैश्वीकरण

 

सिद्धांतों में बहुत ही मनोहारी दिखने वाला वैश्वीकरण आज व्यावहारिकता के मोर्चे पर चोट खा रहा है और राजनीतिक मोर्चे पर उसके समर्थकों की संख्या लगातार घटी है। वित्तीय सेवा कंपनी मोर्गन स्टेनली एशिया के पूर्व चेयरमैन तथा मुख्य अर्थशास्त्री स्टीफन एस रोच ने एक लेख में यह निष्कर्ष पेश करते हुए कहा है कि ब्रेक्जिट तथा अमरीका में डोनाल्ड ट्रंप का उदय .. यही सीख देता है। यही नहीं, ये घटनाएँ चीन के खिलाफ़ दुनिया भर में चल रहे प्रतिघात को भी रेखांकित करती हैं जो कि लगातार बढ़ रहा है।

वे कहते हैं कि दुनिया में वैश्वीकरण का अब कोई राजनीतिक समर्थन नहीं रहा है।

स्टीवन ने प्रोजेक्ट सिंडीकेट में इस बारे में एक आलेख लिखा है। उन्होंने मौजूदा हालात को मुक्त व्यापार के समर्थकों के लिए बड़ा झटका बताया है। उन्होंने इसे चमकते डिस्कनेक्ट, संपर्कहीनता करार दिया है। उनका कहना है कि सच्चाई पता होनी चाहिए। और सच्चाई यह है कि वैश्वीकरण का कोई बहुत कठोर, बहुत तय सिद्धांत नहीं है। अर्थशास्त्री सबसे अच्छा उदाहरण जो दे सकते हैं वह डेविड रिकार्डो की वह रूपरेखा है जो उन्होंने उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में पेश की। इसके अनुसार,’अगर कोई देश अपने तुलनात्मक फायदों या लाभ के हिसाब से उत्पादन करता है तो उसे सीमापारीय व्यापार से फायदा होगा।’

स्टीवन ने व्यापार उदारीकरण को वैश्वीकरण के मंथन से निकला अमृत करार दिया है। उनका कहना है कि व्यापारी उदारीकरण सभी के लिए फायदे का वादा करता है। उन्होंने लिखा है कि यह वादा दीर्घकालिक स्तर पर खरा भी उतरता है लेकिन वास्तविकता के धरातल पर इसे समय समय पर कड़े परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। उन्होंने ब्रेक्जिट यानी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने के फैसले को भी कमोबेश इसी तरह परीक्षाएं बताया है।

स्टीवन का कहना है कि आर्थिक एकीकरण व वैश्वीकरण पूरी तरह से एक जैसा नहीं है। यानी दोनों एक जैसी चीजें नहीं हैं। लेकिन वे व्यापार उदारीकरण के रिकार्डो के उसी सिद्धांत पर आधारित हैं। ये सिद्धांत राजनीतिक परिदृश्य में नक्कारखाने की तूती बन जाते हैं। इस संबंध में उन्होंने अमरीका में डोनाल्ड ट्रंप की सोच व सिद्धांतों का जिक्र किया है जिसको लेकर वे आगे बढ़ रहे हैं और कहा है कि वे उसी धारणा को परीलक्षित करते हैं जिसके चलते ब्रेक्जिट हुआ।

स्टीवन का कहना है कि आव्रजन से लेकर व्यापार उदारीकरण तक, संकटग्रस्त मध्यम वर्ग पर बढ़ता आर्थिक दबाव वैशवीकरण के मूल वादे के प्रतिकूल है।

स्टीवन ने लिखा है— जैसा कि इतिहास आगाह करता है कि विकल्प चाहे वह ब्रेक्जिट हो या अमेरिका का नया पृथक्कतावाद, यह आसन्न दुर्घटना है। इसे टालना, हमारी और मुक्त व्यापार तथा वैशवीकरण के हर समर्थक की जिम्मेदारी है। इसके लिए जरूरी है कि श्रमिकों के समक्ष मौजूदा वास्तविक चुनौतियों से निपटने का कोई व्यावहारिक समाधान पेश किया जाए।

स्टीवन एस रोच का पूरा आलेख यहाँ पढ़ें।

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Source - स्टीवन एस रोच, प्रोजेक्ट सिंडीकेट