गूगल का इंजीनियर जो जान हथेली पर लेकर चलता था

BY Nalin | PUBLISHED: 10 September 2016

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नवप्रौद्योगिकी के केंद्र सिलिकॉन वैली को आमतौर पर तीक्ष्ण बुद्धि वाले इंजीनियरों के लिए जाना जाता है. ज्यादातर लोगों को नहीं पता कि भविष्य की दुनिया का ताना-बाना बुनने में व्यस्त इंजीनियरों की जमात में एडवेंचर पसंद करने वाले ऐसे युवाओं की भी खासी संख्या है जो व्यावसायिक जोखिम लेने के साथ-साथ व्यक्तिगत खतरा उठाने के लिए भी हरदम तैयार रहते हैं.

ऑनलाइन पत्रिका क्वार्ट्ज़ ने ऐसे ही एक साहसिक युवक डैन फ्रेडिनबर्ग को याद किया है. डैन शीर्ष इंटरनेट कंपनी गूगल में प्राइवेसी के विशेषज्ञ थे. लेकिन 33 साल की उम्र में जब डैन ने इस दुनिया को अलविदा कहा तो वह गूगल के मस्ती वाले माहौल के लिए मशहूर कैंपस में नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट के करीब थे.

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आम पर्वतारोहियों की तरह डैन का उद्देश्य सिर्फ एवरेस्ट फतह  करना ही नहीं था बल्कि वे वहां 360 डिग्री की पैनोरमिक छवियों का पर्यायवाची बन चुके गूगल स्ट्रीट व्यू कैमरे से एवरेस्ट की चोटी तक के एक-एक बिंदु की तस्वीरें खींचने पहुंचे थे. पिछले साल जिस भूकंप ने नेपाल में तबाही मचाते हुए हजारों लोगों की जान ली थी, वही एवरेस्ट पर एक बड़े हिमस्खलन का कारण बना जिसने डैन फ्रेडिनबर्ग को लील लिया.

उल्लेखनीय है कि डैन ने 2014 में भी एवरेस्ट को फतह करने की कोशिश की थी. तब वे मरते-मरते बचे थे. लेकिन इससे हतोत्साहित होने के बजाय उन्होंने गूगल से एक और अभियान की स्वीकृति के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था. दुनिया को घर बैठे अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप पर गूगल मैप के भीतर एवरेस्ट की पैनोरमिक तस्वीर देखने को मिल सके, इसके लिए प्रयास करते हुए उनकी जान चली गई.

डैन फ्रेडिनबर्ग की कहानी विस्तार से अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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10 September 2016