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अरुणाचलः शक्तिपरीक्षण से पहले ही भागे तुकी, पेमा खांडू होंगे नए मुख्यमंत्री

BY Shivkant | PUBLISHED: 16 July 2016

 

अरुणाचल की जनता को उन का नया मुख्य मंत्री मिलने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा। तेज़ी से बदलते  हालात में पेमा खांडू का नाम अचानक उछला। पेमा खांडू भूतपूर्व मुख्य मंत्री दोरजी खांडू के पुत्र हैं। उनके नाम पर सहमति बनने में देर न लगी और सर्वसंमति से उन्हें नौवाँ मुख्य मंत्री मान लिया गया। 

दरअसल कांग्रेस ऐसे फार्मूले पर भी विचार कर रही थी, जिससे कि नेतृत्व बदलने से कांग्रेस के बाग़ी विधयाक पार्टी में वापस आ जाएँ और राज्य में कांग्रेस की सरकार सत्ता में रह जाए। पेमा खांडू ही वे विधायक हैं जिन्होंने सब से पहले नाबम तुकी के विरोध में बिगुल बजाया था। 

बता दें कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश विधानसभा सत्र को एक महीने पहले बुलाने के राज्यपाल जेपी राजखोआ के निर्णय को असंवैधानिक बताते हुए इसे ख़ारिज कर दिया और प्रदेश में नाबम तुकी के नेतृत्ववाली बर्ख़ास्त कांग्रेस सरकार को फिर से बहाल कर दिया था। न्यायमूर्ति जेएस खेहर की अगुवाई वाले पांच न्यायाधीशों के संवैधानिक पीठ ने सर्वसम्मति से दिये गये अपने फै़सले में कहा कि अरूणाचल विधानसभा में 15 दिसंबर, 2015 की यथास्थिति कायम रखी जाये.

अरुणाचल प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता का दौर उस समय शुरू हुआ था जब दिसंबर को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राज्यपाल जेपी राजखोआ के विधानसभा के सत्र को एक महीने पहले 16 दिसंबर को ही बुलाने के फै़सले को सही ठहराया था. इसके बाद 26 जनवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया और कांग्रेस की नाबम तुकी वाली सरकार परेशानी में आ गई क्योंकि 21 विधायक बाग़ी हो गए। इस से कांग्रेस के पास 47 में से 26 विधायक रह गए। सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी को दूसरी सरकार बनाने से रोकने की तुकी की याचिका नामंज़ूर कर दी। 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही बाग़ी हुए कालीखो पुल ने 20 बागी विधायकों और 11 बीजेपी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री की शपथ ले ली और सरकार बना ली थी। लेकिन कांग्रेस ने हार नहीं मानी और अरुणाचल प्रदेश के स्पीकर नबम रेबिया ने सुप्रीम कोर्ट में ईटानगर हाईकोर्ट के उस फै़सले को चुनौती दी थी।

मंज़र आलम, गुवाहाटी, एडिटप्लैटर.कॉम

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