कौन है भारत में​ शिशुओं की मौत का जिम्मेदार?

BY EP HINDI DESK | PUBLISHED: 17 August 2016

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हाल ही में एक अध्ययन में कहा गया कि भारत में हर साल 58,000 नवजात शिशु एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीवाणु या सुपरबग के कारण अकाल मौत के मुंह में चले जाते हैं। यह हैरान परेशान करने वाला तथ्य है। फिल्म निर्माता व पत्रकार यारा बो मेल्हम ने इस मुद्दे पर एक रपट अलजज़ीरा में लिखी है।

अपनी इस रपट में उन्होंने अमरावती की अंजलि ठाकुर की कहानी बताई है जिनका पहला बच्चा, अपरिपक्व था यानी तय समय से पहले ही पैदा हुआ। यह बच्ची सात दिन तक आईसीयू में जीवन मृत्यु के बीच संघर्ष करती रही। अंजलि ने बच्ची के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थनाएं की तो डाक्टरों ने एंटीबायोटिक चढ़ाते रहे। लेकिन कोई काम न आई। न दुआ न दवा।

अंजलि ने बताया,’डॉक्टरों ने बच्ची को अनेक दवाएं दी लेकिन किसी ने भी असर नहीं किया। उसे तेज बुखार था, डाक्टरों ने उसे दवा दी, आक्सीजन मास्क लगाया और ड्रिप भी।’ अंजलि ने अपनी बच्ची का नाम भी सोच लिया था लेकिन वह नामकरण से पहले ही चल बसी।

यारा बो का कहना है कि अंजलि की बेटी भारत के उन हजारों नवजात शिशुओं में से एक थी जो हर साल असमय ही मौत के मुहं में समा जाते हैं। ये बच्चे ऐसी सामान्य बीमारी से पीड़ित होते हैं जिनका आसानी से इलाज किया जा सकता है।

दुनिया भर में नवजात शिशुओं की कुल जितनी मौतें होती हैं उनमें से एक तिहाई भारत में होती हैं। रपट में यह आशंका जताई गई है कि एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया या कथित सुपरबग की बढ़ती संख्या भारत में शिशु मृत्यु दर को घटाने में हाल ही में मिली सफलता पर पानी फेर सकती है।

प्रमुख माइक्रोबायोलाजी रिसर्चर प्रोफेसर रमन लक्ष्मीनारायण ने हाल ही में नवजात शिशुओं की मौतों पर एक अध्यययन किया है। इसमें अनुमान लगाया गया है कि भारत में हर साल 58000 शिशु सुपरबग के कारण अकाल मौत का शिकार होते हैं।

प्रोफेसर रमन का कहना है,’दुनिया भर में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी समस्या में भारत निसंदेह रूप से सबसे आगे है।’

सेंटर फोर डीजज डायनामिक्स, इकनामिक्स एंड पोलिसी के निदेशक रमन ने कहा,’दवा प्रतिरोधी संक्रमण के नवजात शिशुओं की मौतों की संख्या भारत में सबसे अधिक है। इसका मतलब ऐसे संक्रमण से है जिसका इलाज पारंपरिक एंटीबायोटिक से नहीं हो सकता।’

उन्होंने कहा,’यह संख्या समय के साथ बढ़ेगी ही।’

पूरी रपट यहाँ पढ़ें।

सुपरबग और भारत

भारत में हर साल 58000 बच्चे सुपरबग के कारण मृत्यु का शिकार होते हैं।

अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि नवजातों में संक्रमण की वजह बनने वाले 60—80 प्रतिशत जीव, सामान्य एंटीबायोटिक से प्रतिरोधी क्षमता हासिल कर चुके हैं।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा एंटीबायोजिटक खपत करने वाला देश है।

कम से कम एक एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीवाणु जो सबसे पहले भारत में पाया गया अब 70 से अधिक देशों में फैल चुका है।

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Source - यारा बो मेल्हम, अलजज़ीरा