दीपा: ओलंपिक खेलों में भारत की पहली महिला जिम्नास्ट

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नयी दिल्ली। यह रियो ओलंपिक शुरू होने से लगभग एक महीने पहले की बात है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रियो ओलंपिक में भाग लेने जा रहे भारतीय दल से नयी दिल्ली में मुलाकात की। इसी दौरान वे दीपा करमाकर से मिले और बोले,’दीपा, मेडल लेकर आना।’

इस पर करमाकर ने मुस्कारते हुए कहा,’सर, मैं मेडल जीतने की पूरी कोशिश करूंगी।’

करमाकर एक विलक्षण एथलीट साबित हुई हैं। वे ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाली पहली महिला जिम्नास्ट हैं। इससे पहले जिन 11 भारतीय जिम्नास्ट ने ओलंपिक में भाग लिया वे सभी पुरुष थे।

कल परसों ही अपना 23वां जन्मदिन मनाने वाली दीपा पांच बार राष्ट्रीय जिम्नास्टिक चैंपियन रह चुकी हैं। उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा मोड़ ग्लोसगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों को कहा जा सकता है। अंतिम चरण में पहुंचने वाली एथलीट में आठवें नंबर पर थीं कि उन्होंने बहुत ही कठिन माने जा रहे प्रोदुनोवा किया। किसी प्रतियोगिता में उन्हें पहली बार जिम्नास्ट की इस रूप को अपनाया और सफलतापूर्वक किया। इसके परिणाम में उन्हें कांस्य पदक मिला। यह किसी भी महिला भारतीय जिम्नास्ट के लिए पहला पदक रहा।

इसके बाद अगले साल एशियन चैंपियनशिप, हिरोशिमा में दीपा ने एक और कांस्य पदक जीता। लेकिन एक महीने बाद ही आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक की दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं से मुकाबला करते हुए, विश्व चैंपियनशिप में वे पांचवें स्थान पर आईं। इस प्रतियोगिता की पहली चार प्रतिभागियों को सीधे ही रियो ओलंपिक का टिकट मिल गया लेकिन दीपा को अपना स्थान पक्का करने के लिए इस साल अप्रैल में रियो परीक्षण कार्यक्रम में भाग लेना पड़ा।

यहां दीपा भाग्यशाली रही और अंतिम चयनितों की सूची में उसे दूसरे आरक्षित जिम्नास्ट के रूप में चुन लिया गया क्योंकि उत्तर कोरिया इससे हट गया था। यहां भी प्रोदुनोवा का इस्तेमाल करते हुए करमाकर ने वाल्ट में गोल्ड जीता और रियो 2016 के लिए टिकट पक्का कर लिया।

करमाकर का जन्म अगरतला में हुआ जो कि पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा की राजधानी है। यहां जिम्नास्टिक की जड़ें बहुत गहरी हैं जिसे कभी कोच दलीप सिंह ने 20वीं सदी के मध्य में लगाया था। वैसे भी पूर्वोत्तर भारत के जीवन में खेल अहम हिस्सा है। इस इलाके से सबसे चर्चित महिला एथलीटों में ओलंपिक पदक विजेता मैरी कोम हैं।

करमाकर को खेलों में बढ़ावा देने वाले उनके माता पिता ही हैं। उनके पिता दुलाल जिम्नास्टिक के प्रशसंक रहे हैं और इस समय भारोत्तोलन के कोच हैं। उन्होंने ही दीपा को जिम्नास्ट पर ध्यान देने हो कहा। जिम्नास्टिक में दीपा की शुरुआत तब हुई जबकि वह आठ साल की थी और तब से लेकर अब तक उनके कोच बिंदेश्वर नंदी हैं।

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Source - नागराज गोलापुड्डी, अलजज़ीरा