ताजा समाचार

आखिर किनके लिए हैं बड़े मूल्य के नोट?

BY Nalin | PUBLISHED: 6 September 2016

euro

दुनिया इस समय करेंसी नोटों, ख़ास कर बड़े मूल्य के नोटों से अटी पड़ी है. मसलन अमेरिका में प्रति व्यक्ति 4200 डॉलर की नकदी उपलब्ध है, और इसका 80 प्रतिशत 100 डॉलर के नोटों के रूप में है. इसी तरह जापान में उपलब्ध नकदी का 90 प्रतिशत 10000 येन के नोटों के रूप में है. ये कोई अच्छी स्थिति नहीं कही जा सकती क्योंकि इतनी अधिक नकदी की उपलब्धता का असल लाभ बेनामी अर्थव्यवस्था को होता है, वैध अर्थव्यवस्था को नहीं.

ये विचार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुख्य अर्थशास्त्री रह चुके केनेथ रोगॉफ़ के हैं.

हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र और लोकनीति के प्रोफेसर रोगॉफ़ का कहना है कि वे नकदीरहित समाज की वकालत नहीं कर रहे क्योंकि यह न तो संभव है और न ही इस दिशा में प्रयास किए जाने की जरूरत है. वह छोटे स्तर के लेनदेन में नकदी के उपयोग से जुड़ी गोपनीयता के महत्व को भी स्वीकार करते हैं. उनका जोर सिर्फ बेनामी अर्थव्यवस्था के लिए नकदी की आसान उपलब्धता पर लगाम लगाने पर है.

प्रोफेसर रोगॉफ़ कहते हैं कि अधिकारियों को रिश्वत खिलाने, वित्तीय अपराध करने और कर चोरी करने के अनेक तरीक हो सकते हैं, लेकिन यह सच्चाई है कि ऐसे सारे अवैध कार्यों में लेनदेन का मुख्य माध्यम बड़े मूल्य के करेंसी नोट होते हैं. इसके पीछे कई कारण हैं जिनमें कम जोखिम और ढोने में आसानी प्रमुख हैं. यदि आपके पास पर्याप्त संख्या में 500 यूरो के नोट हों तो आप अपने पर्स में लाखों डॉलर लेकर चल सकते हैं.

सिर्फ अमेरिका की ही बात करें तो वहां सालाना करीब 700 अरब डॉलर की कर चोरी होती है, उच्चतर कर दर वाले यूरोप की स्थिति तो और भी भयावह होगी. बड़े मूल्य के नोटों के चलन कारण कर चोरी आसान हो जाती है. यदि ऐसे नोटों के सहारे होने वाले मादक दवाओं के व्यापार, मानव तस्करी, वेश्यावृति, आतंकवाद और हफ्ता वसूली जैसे अपराधों की  बात सोचें तो बड़े करेंसी नोटों के नुकसान का सही अनुमान तक लगाना संभव नहीं होगा.

इसी तरह बेनामी अर्थव्यवस्था में कार्यरत लोगों को नकद भुगतान की सुविधा को ही अवैध प्रवासियों की समस्या की सबसे बड़ी वजह के रूप में देखा जा सकता है.

ऐसा नहीं है कि केंद्रीय बैंक बड़े मूल्य के नोटों के बुरे असर के प्रति बेखबर हैं. यूरोपीय सेंट्रल बैंक पहले ही 500 यूरो के मेगा नोट का प्रचलन बंद करने का इरादा व्यक्त कर चुका है. दक्षिण यूरोपीय देश इस दिशा में अपने स्तर पर भी प्रयास कर रहे हैं. ग्रीस और इटली नकदी आधारित लेनदेन पर क्रमश: 1500 और 1000 यूरो की सीमा लगाना चाहते हैं.

प्रोफेसर रोगॉफ़ सरकारों से बड़े नोटों को धीरे-धीरे प्रचलन से बाहर करने की अपील करते हैं ताकि अधिकतम 10 डॉलर या उसके बराबर मूल्य के नोट ही लेनदेन के लिए उपलब्ध रहे. इससे अवैध कार्यों और बड़े स्तर पर कर चोरी में लिप्त लोग ज्यादा जोखिम और कम तरलता वाले भुगतान माध्यमों के इस्तेमाल के लिए बाध्य होंगे, जो उनके धंधे में अवरोध बनेगा और उनके पकड़े जाने की संभावना को बढ़ाएगा.

न्यू टाइम्स में प्रकाशित प्रोफेसर केनेथ रोगॉफ़ के आलेख को संपूर्णता में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटरपर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App

बड़ी खबरें

6 September 2016