चोटी की हस्तियों के हेयर स्टाइल

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अमरीका में राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों के साथ साथ व्यवहार व पहनावे को लेकर भी चर्चा में है। उनके केश विन्यास या हेयर स्टाइल की विशिष्ट शैली को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है। बार्ड कालेज में पत्रकारिता के प्रोफेसर इयन बरूमा ने भी इस बारे में एक आलेख लिखा है जो कि प्रोजेक्ट सिंडीकेट पर प्रकाशित हुआ है।

इसमें उन्होंने लिखा है कि ट्रंप के अनूठे हेयर स्टाइल को लेकर बहुत कुछ कहा जा चुका है, काफी कुछ लिखा जा चुका है। ट्रंप के बाल थोड़े उठे हुए हैं जिनमें हमेशा कंघी की होती है। उन्हें देखते हुए किसी के भी दिमाग में आमतौर पर किसी नाइटक्लब के मैनेजर की छवि बनती है न कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की। अब और कहने को क्या बचा है? वास्तव में राजनीति में केश विन्यास या हेयर स्टाइल का सवाल इतना मामूली नहीं है जितना यह नजर आ रहा है।

इयन ने यहां सवाल किया है कि दुनिया के कितने राजनेताओं विशेषकर लोकप्रिया या चर्चित राजनेताओं ने अजब गजब हेयरस्टाइल अपनाए हैं। उन्होंने इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिलवियो बर्लुस्कोनी का जिक्र किया है जो कि अपने दो हेयर ट्रांसप्लांट के बाद भी दिखने वाली जगह को भरने के लिए काली पेंसिल का इस्तेमाल करते हैं। या डच नेता गीर्ट वाइल्डर्स जो कि अपने बालों को प्लेटिनम चमकीला रंगे रहते हैं। इसी तरह ब्रेक्जिट में चर्चा में रहे बोरिस जानसन का हमेशा ही एक जैसे चमकते बालों का हेयरस्टाइल।

इन सभी नेताओं को शहरी संभ्रांतों के खिलाफ जनता के आक्रोश व नाराज़गी का समर्थन मिला है।

इयन ने अपने आलेख में यूरोप में आधुनिक लोकप्रियतावाद के पिता पिम फोच्यूइन का भी जिक्र किया है जिनके सिर पर एक भी बाल नहीं था। वे हमेशा अपनी गंजी खोपड़ी चमकाकर रखते थे। उन्होंने हिटलर से लेकर उत्तर कोरिया के किम जोंग उन तक विभिन्न नेताओं का उदाहरण दिया और कहा है कि जरूरी नहीं है कि घने लंबे या चमकीले बालों वाले या अजब गजब हेयरस्टाइल वाले नेता ही लोकप्रिय हों। इससे इतर भी अनेक नेताओं ने लोकप्रियता की बुलंदियां छुई हैं।

इस सारी बहस में यह बताने की कोशिश की है कि नाराजगी से उपजी लोकप्रियता के हमारे इस दौर में उचित तर्क व रजानीतिक आशावाद को अब नकारात्मक गुणवत्ता में आसानी से बदला जा सकता है जो एक बेपरवाह व आमलोगों की चिंताओं को अनजात संभ्रांत की निशानी है। इयान ने कहा है कि उचित तर्क तो 51.9 प्रतिशत ब्रितानी नागरिकों को यूरोपीय संघ में बने रहने को रजामंद नहीं कर सके। इसलिए हो सकता है कि सधे हुए तर्क एक अज्ञानी व खतरनाक मसखरे को अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से नहीं रोक सकें।

इयन बरूमा का पूरा लेख यहाँ पढ़ें।

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Source - इयान बरूमा, प्रोजेक्ट सिंडीकेट