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स्कोर्पीन डेटा लीक से प्रोजेक्ट-75 की सुरक्षा खतरे में नहीं

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स्कोर्पीन डेटा लीक के असर के बारे में एक रपट सुशांत सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखी है जो इस मुद्दे पर विभिन्न विशेषज्ञों से बातचीत पर आधारित है।

इसके अनुसार भारतीय नौसेना में पहली पनडुब्बी शामिल होने के स्वर्ण जयंती समारोह अगले साल होने है। इन समारोहों के लिए पनडुब्बी शाखा के 100 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने वट्सऐप पर एक ग्रुप बनाया जो पिछले मंगलवार की रात से ही एक बड़ी बहस का मंच बना हुआ है। यह बहस आस्ट्रेलियन की रपट को लेकर है जो कि प्रोजेक्ट 75 की लीक सूचनाओं पर आधारित हैं हालांकि इस मंच पर इतने दिनों की बहस के बाद यही राय बनी, सार निकला कि इस तरह के डेटा, सूचनाओं को सार्वजनिक करना अच्छी बात नहीं है और कि इसका प्रोजेक्ट-75 पर कोई बड़ा असर नहीं होगा।

सेवानिवृत्त कैप्टन जे एस मलिक को पनडुब्बियों का 32 साल का अनुभव है और वे नौसेना मुख्यालय में पनडुब्बी परिचालन के निदेशक भी रहे हैं। उन्होंने कहा,’इसमें से ज्यादातर डेटा जेनरिक है और नौसेना द्वारा फ्रांसीसी कंपनी को उपलब्ध कराए गए ‘नौसेना कर्म्चारी गुणवत्ता संबंधी जरूरतें, एनएसक्यूआर, से संबंधित है। यह उत्पाद यानी पनडुब्बी के लिए ‘बाध्यकारी सूचना’ है। यह किसी विशेष पनडुब्बी से जुड़ा हुआ नहीं है और इसका प्रतिकूल असर बहुत कम ही हो सकता है।’

प्रोजेक्ट 75 की तैयारियों से जुड़े रहे कमोडोर ए जय सिंह का कहना है,’एक ही चीज जो कि हमारे पनडुब्बियों के परिचालन के लिए खतरा बन सकती है वह है आग नियंत्रण प्रणाली का सोर्स कोड। यह अति गोपनीय चीज़ है जो कि डीसीएनएस को हथियार देने वाली कंपनी को देने की जरूरत नहीं होगी। आस्ट्रेलियन ने यह दावा नहीं किया है कि उसके पास साफ्टवेयर कोड है और उसके अलावा कुछ भी ज्यादा मायने नहीं रखता’

क्या है प्रोजेक्ट 75 और लीक प्रकरण:

उल्लेखनीय है कि स्कोर्पीन पनडुब्बी मुंबई की मझगांव डॉक लिमिटेड और फ्रांस की कंपनी ‘डीसीएनएस’ बना रही है। केंद्र में मौजूदा भाजपा नीत सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम शुरू किया तो इस परियोजना ने भी जोर पकड़ा। ये पनडुब्बी जिस परियोजना के तहत बन रही है उसका कूट नाम ‘प्रोजेक्ट 75’ है। प्रोजेक्ट 75 के तहत पांच पनडुब्बियां बननी हैं।

आस्ट्रेलिया के ऑस्ट्रेलियन अखबार में एक रपट प्रकाशित हुई जिसके अनुसार स्कोर्पीन से जुड़ा 22400 पन्नों के दस्तावेज लीक हो गए हैं। अखबार के अनुसार, डीसीएनएस का कुल 22,400 पन्नों का जो डेटा लीक हुआ है उसमें भारत की नई पनडुब्बियों की रडार से बच निकलने की गोपनीय क्षमता की जानकारी है. वहीं भारतीय नौसेना का कहना है कि इस लीक का हमारी स्कॉर्पीयन पनडुब्बी परियोजना पर ज्यादा असर नहीं होगा क्योंकि यह लीक विदेशी की धरती से हुआ है भारत से नहीं। रक्षा मंत्रालय के अधिकारी पहले इसके भारतीय पहलू की जांच करेंगे और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को प्रारंभिक रिपोर्ट सौपेंगे।

पूरी रपट यहाँ पढ़ें।

 

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Source - सुशांत सिंह, इंडियन एक्सप्रेस