चलना बलूचिस्तान के पत्ते का!

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बलूचिस्तान व गिलगित-बल्तिस्तान को लेकर भारत के नये व मुखर तेवर हो लेकर अनेक तरह की बातें कही जा रही है। विशेषज्ञों की अलग अलग राय है। वरिष्ठ पत्रकार व लेखक भानुप्रताप मेहता के अनुसार भारत के इस नये तेवर की सच्चाई यह है कि: हमने यह मान लिया है कि भारत व पाकिस्तान बहुत गहरे से बंटे हैं, उनमें बहुत गहरी खाई है।

मेहता ने इंडियन एक्सप्रेस में अपने एक लेख में यह बात कही है। इसमें उन्होंने लिखा है कि बलूचिस्तान व गिलगित-बाल्तिस्तान को लेकर भारत को यह नया उत्साह है वह एक चाल, भ्रम व सच्चाई इन तीनों का मिश्रण है। इसमें चाल यह है कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद व उग्रवाद के अन्य रूपों की मदद कर रह है और  उकसा रहा है। भारत व पाकिस्तान दोनों के पास ही परमाणु हथियार हैं। इस सुस्पष्ट तथ्य के कारण जवाबी कार्रवाई के भारत के विकल्प सीमित हो जाते हैं। किसी भी तरह की गंभीर कार्रवाई के साथ संभावित अनियंत्रित प्रसार का जोखिम जुड़ा हुआ है। चूंकि पाकिस्तान यह जानता है तो वह परिणामों की चिंता किए बिना जितना चाहे या यूँ कहें कि असीमित रूप से भारत के खिलाफ काम कर सकता है।

इसमें उन्होंने लिखा है कि भारत की प्रतिक्रिया तो पाकिस्तान की ‘मूर्खताओं’ की कीमत चुकाना ही है। भारत की स्थिति को उसका विवेक समझा जाए या कमजोरी के रूप में देखा जाए यह आपकी इतिहास की समझ तथा मनोवैज्ञानिक अनुमानों पर निर्भर करता है। लेकिन निश्चित रूप से इससे पाकिस्तान की स्थिति किसी भी तरह से रचनात्मक नहीं हो जाती है। भारत में अनेक लोग पाते हैं कि यथास्थिति अस्वीकार्य हैं। वे चाहते हैं कि हालात बदलते यानी यथास्थिति ही नहीं बनी रहे।

मेहता ने अपने आलेख में यह भी बताने की कोशिश की है कि हमारे पास क्या विकल्प हैं। उनके अनुसार एक विकल्प तो यह है उच्च नैतिक धरातल पर बने रहें, राजनयिक समर्थन जुटाएं और उम्मीद करें कि इससे पाकिस्तान बदलेगा। इस रुख से शायद भारत की वैश्विक साख बढाने में मदद मिली हो लेकिन इससे हमारी जो क्षेत्रीय समस्याएं हैं उन्हें दूर करने में अधिक मदद नहीं मिली। यथास्थिति को तोड़ने का एक तरीका यह है कि लीक से कुछ हटकर सोचा जाए। इसके तहत सारी चीजों पर नये सिरे से विचार किया जाए… गिलगित-बल्तिस्तान के दर्जे की वैधता से लेकर, बलूचिस्तान तक। मेहता के अनुसार यह संकेत दिया जा सकता है कि,’हमारे तेवर को आप ‘यूं ही मानकर नहीं चलें’ या इसे ‘फोर ग्रांटेट’ नहीं लें।

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Source - प्रताप भानु मेहता, इंडियन एक्सप्रेस