चोर को पकड़ने की कवायद

coal

ऐसा माना जा रहा है कि सरकार भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन करना चाहती है। पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमणियन ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि कौन लोग और क्यों, इस कानून में बदलाव चाहते हैं?

सुब्रमणियन ने इंडियन एक्सप्रेस में एक आलेख में यह सवाल उठाया है। इसके अनुसार ऐसी अटकलें है कि केंद्र सरकार भ्रष्टाचार निरोधक कानून, PC Act: 1988 में संशोधन पर विचार कर रही है। मुख्य प्रस्तावित संशोधनों में धारा 13 1-D, S को हटाना भी शामिल है जो कि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा ‘बिना सार्वजनिक हित’ के व्यक्तिगत लाभ हासिल करने से सम्बद्ध है। वहीं प्रस्तावित किया जा रहा है कि धारा 17 में एक नई बात जोड़ी जाए जिसके तहत किसी भी मौजूदा या सेवानिवृत्त अधिकारी के खिलाफ जांच या पड़ताल शुरू करने से पहले ‘सक्षम प्राधिकरण’ से मंजूरी लेनी होगी। इन प्रस्तावों से होगा यह कि हमारे प्रशासन में चौतरफा पसरे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए PC कानून का जो भी थोड़ा बहुत इस्तेमाल हो सकता था वह भी कमजोर होगा।

लेख के अनुसार इस तरह के विचार कई सालों से चल रहा हैं लेकिन ऐसा लगता है कि मौजूदा ‘तत्परता’ केंद्र सरकार में कोयला सचिव रहे हरीश गुप्ता को लेकर है। गुप्ता के कार्यकाल में कोयला खान आवंटनों में बहुत सारी अनियमितताएं दर्ज की गईं। यह पिछली संप्रग सरकार का कार्यकाल था। गुप्ता के खिलाफ विभिन्न अदालतों में अनेक मामले चल रहे हैं जिनमें उन्हें आरोपी बनाया गया है। नौकरशाही में उनका बड़े पैमाने पर समर्थन हो रहा है और कहा जा रहा है कि गुप्ता को ‘सताया’ नहीं जाना चाहिए। तथ्य यही है कि गुप्ता बहुत ही ईमानदार अधिकारी रहे जिनकी वित्तीय व व्यक्तिगत ईमानदारी पर सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता। और अगर अंतत: उन्हें सजा होती है तो यह न्याय का उपहास होगा।

लेकिन सुब्रमणियन का यहाँ कहना है कि क्या सिर्फ हरीश गुप्ता की मौजूदा ‘हालत’ PC कानून में संशोधन की पर्याप्त वजह है? क्या सिर्फ इस कारण से इस कानून की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की संभावनाओं को कम किया जाना चाहिए?

सुब्रमणियन ने अपने आलेख में इस कानून में संशोधन के लिए दिए जा रहे तर्कों का भी जिक्र किया है। उन्होंने इस कानून की धारा 13 1-D, S को ‘असंवैधानिक’ बताए जाने का जिक्र करते हुए कहा है कि बीते 25 साल में उच्चतम न्यायालय ने तो एक बार भी इस कानून को ‘असंवैधानिक’ नहीं पाया।

सुब्रमणियन ने एक तरह से इस कानून में संशोधन का विरोध करते हुए कहा है कि पहले से ही कमजोर, क्षीण हमारे कानूनों को और कमजोर बनान कोई समाधान नहीं है। बल्कि हमारी जांच एजेंसियों को पाक साफ बनाए जाने तथा कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाए जाने की जरूरत है।

पूरा आलेख यहाँ पढ़ें।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटरपर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App

Source - टीएसआर सुब्रमणियन, इंडियन एक्सप्रेस