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पाकिस्तान: सैनिक, कारोबारी और भ्रष्टाचार

Pakistanis parade through the streets during celebrations to mark the country's Independence Day in Islamabad, Pakistan, Sunday, Aug. 14, 2106. Millions of Pakistanis celebrate the 70th Independence Day from British rule.(AP Photo/Anjum Naveed)पा

पाकिस्तान में सेना तथा जनप्रतिनिधियों या सरकार के बीच खींचतान कोई नई बात नहीं है। विभिन्न मुद्दों को लेकर यह चलता रहता है। एक प्रमुख मुद्दा भ्र्ष्टाचार का है। लेकिन क्या भ्रष्टाचार सिर्फ सिविल या लोकप्रशासन या नेताओं तक सीमित है। किंग्स इंडिया इंस्टीट्यूट, लंदन में प्रोफेसर  क्रिस्टोफी जेफरलॉट ने इंडियन एक्सप्रेस में अपने एक लेख में इस मामले पर प्रकाश डालते हुए लिखा है कि पाकिस्तान की सेना को अपने भीतर यानी सेना में मौजूदा भ्रष्टाचार के खिलाफ भी लड़ाई जीतनी होगी।

इसमें उन्होंने लिखा है – जब पाकिस्तान का कोई सेना प्रमुख नागरिक सरकार से सत्ता छीनता है तो वह अपने कदम को यह कहते हुए सही ठहराता है कि नागरिकों में ईमानदारी की कमी है। यानी आम लोग या नेता ईमानदार नहीं हैं। परवेज मुशर्रफ इसके अपवाद नहीं हैं। वर्ष 1999 में उन्होंने राष्ट्रीय जवाबदेही आदेश, यानी NO जारी किया, ठीक वैसा ही जैसा 1959 में अयूब खान ने निर्वाचित निकाय निर्हरता आदेश, EBDO, जारी किया था जिसमें संदिग्ध भ्रष्ट राजनेताओं के सामने विकल्प रखा गया था कि या तो वे राजनीति से संन्यास ले लें या मामले का सामना करें।

NO के कारण राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो बना जिसमें भ्रष्टाचार विरोधी अभियान शुरू किया जो अन्य के अलावा बेनजीर भुट्टो पर केंद्रित था।

इसके अनुसार आज सेना सत्ता में नहीं है और वह ऐसा कर भी नहीं सकती लेकिन वे किसी न किसी बहाने से नागरिक शासकों यानी नेताओं और सरकारी अधिकारियों में ईमानदारी की कमी का मुद्दा लाती रहती है और सत्यनिष्ठा के लिए साख बनाने की कोशिश करती है। पिछले वसंत में सेना प्रमुख राहील शरीफ ने पनामा दस्तावेजों का बहुत बड़ी चालाकी से इस्तेमाल किया। इन दस्तावेजों से प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की साख प्रभावित हुई। राहील ने प्रधानमंत्री से कहा कि वह पनामा दस्तावेजों का मुद्दा स्पष्ट करें। यानी इससे पाक साफ साबित हों।

यहां उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री शरीफ की आय चार साल में दोगुनी होकर लगभग दो अरब पाकिस्तानी रुपए हो गई है। इस मामले में शरीफ को बचाव का रुख अपनाने को मजबूर होना पड़ा।

लोक सेवाओं की साफ सफाई की अपनी प्रतिबद्धता के तहत सेना प्रमुख ने सेना के छह अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त कर दिया जिनमें दो जनरल शामिल हैं। सेना प्रमुख ने चर्चित संबोधन में कहा,’पाकिस्तान की एकता, अखंडता व संपन्नता के लिए सभी स्तरों पर जवाबदेही जरूरी है।’ उनके इस प्रत्याशित कदम की मंशा दुनिया को यह दिखाना था कि सेना अपने स्तर पर या अपने परिचालन में ‘साफ सफाई’ करना जानती है लेकिन राजनेता भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।

जिस घोटाले के चलते सेना प्रमुख ने उक्त अप्रत्याशित कदम उठाया वह एक परिवहन कंपनी नेशनल लाजिस्टिक्स सेल द्वारा तीन से चार अरब रुपए का गैर कानूनी निवेश शेयर बाजार में किए जाने से जुड़ा हैं। इस कंपनी में 7200 कर्मचारी हैं जिनमें 2500 मौजूदा सैन्यकर्मी हैं। अपने आलेख में जेफरलॉट ने पाकिस्तान में हाल ही में सामने आए प्रमुख घोटालों तथा सेना की कार्रवाइयों का जिक्र किया है।

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Source - क्रिस्टोफ़ जेफ़रलॉट, इंडियन एक्सप्रेस