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तीन तलाक: यह बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक का मामला नहीं

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उच्चतम न्यायालय ने मुस्लिम महिला अधिकारों से संबंधित विभिन्न याचिकाओं मामले पर प्रतिक्रिया के लिए केंद्र को हाल ही में चार हफ्ते का समय दिया है। इसमें तीन तलाक यानी तीन बार  तलाक बोलकर किसी महिला को तलाक देने का बहुचर्चित व विवादास्पद मामला भी है। वरिष्ठ टिप्पणीकार प्रतापभानु मेहता का मानना है कि तीन तलाक की यह बहस व्यक्तिगत आजादी व समानता बनाम उत्पीड़न व पराधीनता की बहस है।

मेहता ने इस मुद्दे पर इंडियन एक्सप्रेस में छपे अपने लेख में कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक की ‘व्यवस्था’ में सुधार के खिलाफ जो आक्रामक व प्रतिक्रियावादी रुख अपनाया है वह हमें उसी बंद संस्थागत गली की याद दिलाता है जहां हम पर्सनल लॉ सुधारों व सिविल कोड के मामले में चले आए। उन्होंने लिखा है कि आल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अधिकार अपने आप में संदिग्ध हैं और यह किसी भी प्रगतिशील लोकतंत्र के मूल्यों व तर्कों के प्रतिकूल हैं। यह संस्था पितृसत्तात्मक व ग़ैर-प्रतिनिधि संस्था के सबसे खराब मिश्रण या स्वरूप को पेश करता है जो कि चुनावी राजनीति की ‘जरूरतों’ का परिणाम है जो कि समुदायों के भीतर सबसे प्रतिक्रियावादी तत्वों की पनाहगाह बनती हैं।

मेहता के अनुसार यह बोर्ड समुदाय की बाकी आवाज़ों को दबाता है, उनको हाशिए पर लाता है और महिलाओं की खुली अवमानना करता दिखता है। उन्होंने इसे ‘राजनीतिक देनदारी’ बताया है। उन्होंने लिखा है कि यह संगठन या संस्थान समुदाय में वंचितों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बीते वर्षों में प्रगतिशील बदलावों का वाहक बन सकता था लेकिन इसने न्याय के खिलाफ रूढ़िवादी कोटर बनना चुना।

उल्लेखनीय है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन सितंबर को उच्चतम न्यायालय में तलाक के मामलों में स्त्री-पुरुष भेदभाव सहित कई मुद्दों को उठाने वाली याचिकाओं का विरोध किया। बोर्ड ने कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर किसी समुदाय के पर्सनल कानूनों को ‘फिर से नहीं लिखा’ जा सकता। बोर्ड ने शीर्ष अदालत में अपने जवाबी हलफनामे में कहा कि बहुविवाह, तीन बार तलाक (तलाक ए बिद्दत) और निकाह हलाला की मुस्लिम परंपराओं से संबंधित विवादित मुद्दे ‘विधायी नीति’ के मामले हैं और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

इस मामले में प्रतापभानु मेहता की पूरी टिप्पणी यहां पढ़ें।

 

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Source - प्रतापभानु मेहता, इंडियन एक्सप्रेस

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6 September 2016