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दो दर्जन खेल संगठनों में से केवल एक का अध्यक्ष ही खिलाड़ी

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भारतीय मैराधन धावक ओ पी जैशा का कहना है कि रियो ओलंपिक में अपनी दौड़ के दौरान भारतीय खेल अधिकारियों ने उनके लिए पानी या ग्लूकोज वाटर की कोई व्यवस्था नहीं की। यही कारण है कि वह दौड़ के दौरान गिर गईं और बेहोश हो गईं। इस आरोप और घटना ने यह एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश के खेल संगठन या एसोसिएशनें सम्बद्ध खेलों व खिलाड़ियों की किस तरह अनदेखी करती हैं।

देवानिक साहा ने इंडियास्पेंड पर एक रपट में कहा है कि भारतीय खेल संगठनों, एसोसिएशन पर खिलाड़ियों के बजाय नेताओं के कब्जे के बारे में काफी कुछ लिखा जा चुका है। अनेक खेल संगठनों पर नेताओं और उनके सगे संबंधियों का सालों साल से ‘कब्जा’ है। अब इस बारे में स्पष्ट आंकड़े भी उपलब्ध हो गए हैं। देश के 27 खेल संगठनों में से केवल एक पर ही कोई एथलीट यानी खिलाड़ी अध्यक्ष है। यानी 27 में से 26 खेल संगठनों को बतौर अध्यक्ष कोई ‘गैर-खिलाड़ी’ चला रहा है जिनमें ज्यादातर नेता हैं।

रपट के अनुसार-

. केवल एक खेल एसोसिएशन —द एथलेटिक्स फेडरेशन आफ इंडिया— का अध्यक्ष पूर्व राष्ट्रीय एथलीट है।

. केवल नौ खेल एसोसिएशन के संचालक मंडल में कोई पूर्व या मौजूदा खिलाड़ी शामिल है।

. 12 खेल एसोसिएशन ने तो अपने अध्यक्ष या सदस्यों के कार्यकाल के बारे में कोई जानकारी तक नहीं दी है।

. केवल दो खेल एसोसिएशन की भविष्य को लेकर कोई योजना है।

. खेल एसोसिएशन के संचालक मंडलों में महिलाओं का हिस्सा 2 प्रतिशत से लेकर 8 प्रतिशत तक है। इसमें हॉकी इंडिया ही एक अपवाद है जिसमें 34 प्रतिशत महिला प्रतिनिधत्व है।

दरअसल उक्त सारे निष्कर्ष एक परामर्श फर्म इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज की एक रपट ‘गवर्नेंस आफ स्पोर्ट्स इन इंडिया’ में निकाले गए हैं। इस रपट में भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन सहित उन 27 खेल संगठनों या फेडरेशनों के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण किया गया है। भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन, आईओए के सदस्यों में 38 राष्ट्रीय खेल फेडरेशन शामिल हैं।

रपट में देश के खेल संगठनों के संचालन ढांचे आदि का विश्लेषण करते हुए इनमें सुधार के अनेक उपाय सुझाए गए हैं ताकि खेलों व खिलाड़ियों का भला हो।

पूरी रपट यहाँ पढ़ें।

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Source - देवानिक साहा, इंडियास्पेंड