< Prev 1 / 6 Next >

पाकिस्तान की हताशा

जम्मू-कश्मीर
पर्यटन के लिहाज से मौसम के अनुकूल होने के बावजूद जम्मू-कश्मीर की स्थिति जटिल और कठिन है। देश के इस हिस्से में जिस तरह की घटनाएं घटती रही हैं, उससे मौजूदा दौर अलग नहीं है। कश्मीर में हम अशांति, पत्थरबाजी, संघर्ष विराम उल्लंघन और बड़े पैमाने पर घुसपैठ की कोशिशों के गवाह रहे हैं। भारतीय सेना की पंद्रहवीं कोर के कमांडर रहे लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन कहते हैं कि ‘पिछले दो हफ्ते में नियंत्रण रेखा के आसपास घुसपैठ की इतने प्रयास देखने को मिले, जितने मैंने हाल के समय में नहीं देखे थे।’ 
 
पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा के नेतृत्व में पाकिस्तानी फौज कुछ ज्यादा ही सक्रिय दिखती है। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान फिर से कश्मीर घाटी को बहस के केंद्र में लाना चाहता है, जहां पाकिस्तान ‘हिट ऐंड रन ऑपरेशंस’, छोटे स्तर के गुरिल्ला हमले और आतंकी कार्रवाइयों के जरिये कश्मीर में जारी अशांति का समर्थन करता है। इसकी पुष्टि गैर पारंपरिक क्षेत्रों के जरिये घुसपैठ के कई प्रयासों से होती है। उसका इरादा अमरनाथ यात्रा से पहले घाटी में ज्यादा से ज्यादा घुसपैठियों को भेजने का है, जिसके पीछे बड़े आतंकी हमलों को अंजाम देने की साजिश हो सकती है।  

निस्संदेह सीमावर्ती क्षेत्र में पाकिस्तान की सक्रियता बढ़ी है। वास्तव में यह उसकी हताशा को दिखाता है। पहली बात तो यह है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख मोटे तौर पर भारत की बहुप्रचारित सर्जिकल स्ट्राइक से उपजे असंतोष के किसी भी संकेत को दबाने के लिए अपने कोर कमांडरों पर अपनी पूरी पकड़ दिखाना चाहते हैं। सर्जिकल स्ट्राइक एक ऐसी घटना है, जिसे सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान ने कभी स्वीकार नहीं किया, लेकिन सैन्य प्रतिष्ठान के भीतर उसको लेकर बेहद नाराजगी है। पद संभालने के तुरंत बाद सैन्य जवानों के साथ नियंत्रण रेखा का उनका दौरा एक विस्तृत घुसपैठ के लिए जमीन तैयार करने के इरादे से ही हुआ था। 

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटरपर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App

Source - प्रशांत दीक्षित, अमर उजाला

< Prev 1 / 6 Next >