ओलंपिक, रियो व आतंक!

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ब्राजील के रियो दि जिनेरो में 2016 के ओलंपिक खेल शुरू हो रहे हैं। दुनिया भर के खिलाड़ी, कोच व खेल प्रेमी वहां पहुंचने शुरू हो गए हैं। लेकिन आयोजन की तैयारियां पूरी होती नहीं दिख रही हैं। व्यवस्थाओं को लेकर सवाल हैं तो सुरक्षा को लेकर चिंता। न्यूयार्क टाइम्स में मॉरिसियो सेंतोरो की एक रपट प्रकाशित हुई है जिसमें ओलंपिक 2016 पर आतंकी व अन्य खतरों को रेखांकित किया गया है।

इस रपट में कहा गया है कि ओलंपिक शुक्रवार को शुरू होने है लेकिन ब्राजील में स्थानीय नेता व समाज का बाकी तबका किसी भी तरह के आतंकी हमले के लिए तैयार नहीं है। जबकि म्यूनिख में 1972 व अटलांटा में 1996 में ओलंपिक खेलों को आतंकवादी हमलों का सामना करना पड़ा था। दरअसल ब्राजील में नेताओं व आम नागरिकों को न तो इस मुद्दे की पर्याप्त जानकारी है और न ही उनके पास पर्याप्त मानव बल व वित्तीय संसाधन हैं।

इसके साथ ही देश में सार्वजनिक सुरक्षा का ढांचा बहुत कमजोर है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिल रहा है लेकिन ब्राजील को खुद इस चुनौती को स्वीकारना होगा और भविष्य के लिए अपने संस्थानों को तैयार करना होगा।

रपट के अनुसार 21 जुलाई के बाद से संघीय पुलिस ने 12 संदिग्धों का गिरफ्तार किया है जिन पर आरोप है कि वे आतंकी संगठन IS से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। ये गिरफ्तारियां उस नये आतंकवाद निरोधक कानून के तहत की गई जो इसी साल पारित हुआ। रपट में कहा गया है कि ब्राजील में आतंकवाद के मुद्दे पर चर्चा करना भी बहुत कठिन है। इसकी ऐतिहासिक वजह है। 1964-85 की तानाशाही ने ‘आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल उसका विरोध कर रहे शांति संगठनों के वर्गीकरण के लिए किया था। उसके बाद से ही मौजूदा लोकतांत्रिक प्रणाली में, राजनीतिक नेतृत्व इस शब्द के इस्तेमाल से बचता रहा है।

इस रपट में कहा गया है कि ब्राजील के लोग केवल आतंकवाद को लेकर अधिकारियों या प्राधिकारों में अनुभव की कमी का सामना ही नहीं कर रहे बल्कि उनके सामने सुरक्षा संसाधनों की कमी का संकट भी है। रियो दि जिनेरो वित्तीय संकट से दो-चार है; अग्निशमन कर्मचारियों, डाक्टरों, पुलिस अधिकारियों व अध्यापकों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा। उनके वेतन में महीने-महीने भर की देरी हो रही है। कई बार दो पुलिस की गाड़ियों में तेल भरवाने तक का पैसा नहीं होता। सरकार ने खेल आयोजन स्थलों पर लोगों की जांच पड़ताल का जिम्मा जिस कंपनी को दिया था वह बहुत छोटी तथा अज्ञात सी है। उसे ओलंपिक जैसे खेलों में काम करने का कोई अनुभव नहीं है। पिछले सप्ताह न्यायमंत्री अलेक्जेंद्र दी मोरेस ने इस ठेके को रद्द कर दिया तथा यह जिम्मेदारी ब्राजीलियन फोर्स को सौंपी। यह सैन्य बल अमरीका के यूनाइटेड स्टेट नेशनल गार्ड की तरह ही है।

इसके अनुसार मौजूदा राजनीतिक संकट जिसमें राष्ट्रपति डिलमा रोजेफ के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शामिल है तथा 25 साल में सबसे खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए ज्यादातर जनता ओलंपिक आयोजन के खिलाफ है या तटस्थ भाव रखती है। केवल 40 प्रतिशत ब्राजीलवासियों का मानना है कि यह आयोजन देश के लिए अच्छा होगा।

पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

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Source - मॉरिसियो सेंतोरो, न्यूयार्क टाइम्स