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योजना न परियोजना; बस चल दिए रियो!

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रियो दि जिनेरो में ओलंपिक खेल शुरू हो रहे हैं। भारतीय एथलीट दल भी वहां पहुंच गया है लेकिन हमेशा की तरह अस्त-व्यस्त। हमेशा की तरह वही पुराने और छोटे मोटे मुददों में उलझा हुआ। और तो और भारतीय खेल प्रशासक यह मसला भी नहीं सुलझा पाए हैं कि महिला एथलीट साड़ी के उपर ब्लेज़र क्यों पहनें?

इंडियन एक्सप्रेस में संदीप द्विवेदी ने इस विषय पर अपनी रपट में में कहा है कि ओलंपिक खेल में भारतीय दल की दिक्कतें और मुद्दे कोई बड़े नहीं है। वे जा रहे हैं, लेकिन होचपोच होकर उन्हीं छोटी-छोटी समस्याओं और मुदों में उलझे हुए। ये मुद्दे ऐसे हैं जिन्हें शायद बरसों पहले या कम से इस ओलंपिक से बहुत पहले सुलझा लिया जाना चाहिए था।

उन्होंने यहां ओलंपिक के उद्घाटन कार्यक्रम में भारतीय दल की महिलाओं द्वारा साड़ी पर ब्लेज़र यानी कोट पहनने का मुद्दे का जिक्र किया है। दरअसल साड़ी पूरी तरह भारतीय परिधान है जबकि ब्लेजर पश्चिम का प्रतीक। दोनों का क्या मिश्रण है। जैसे की रियो जा रही ज्वाला गुट्टा ने कहा,’साड़ी पर ब्लेजर पहनकर हम एक तरह से साड़ी की शोभा ढक रहे हैं। शायद में इसे उपर नहीं पहनूं। इस बार शायद में ब्लेज़र हाथ में ही लेकर चलूं। मुझे साड़ी पसंद है और मैं उससे पूरा न्याय कर सकती हूं लेकिन ब्लेजर….’

किसी दर्ज़ी की इस गलती के बारे में अधिकारियों के अपने तर्क हैं। उनका कहना है कि इससे एथलीट पश्चिमी व औपचारिक लगते हैं और भारतीयता भी रहती है।

रपट के अनुसार ‘ब्लेज़र-साड़ी’  का यह मिश्रण कुल मिलाकर हमारी खेल व्यवस्था की हालत व सोच को परिलक्षित करता है।

संदीप ने अपनी इस रपट में इसी तरह दूसरा मुद्दा टेनिस का उठाया है। हर ओलंपिक से पहले यह बहस होती है कि युगल मैच में कौन किसके साथ खेलेगा। चार साल पहले लिएंडर पेस चाहते थे कि रोहन बोपन्ना उनके साथी हों न कि महेश भूपति। कई दिन के ड्रामे के बाद बोपन्ना ने पेस के बजाय भूपति को चुना। इस बार भी बोपन्ना, पेस को नहीं चाहते लेकिन उन्हें पेस के साथ ही खेलने को मजबूर किया गया। इस बीच सानिया मिर्जा ने पेस की अनदेखी जारी रखी है। लंदन 2012 में वह भूपति के साथ खेलीं जबकि रियो 2016 में बोपन्ना के साथ खेलेंगी।

रपट में इसी तरह के कई मुद्दों को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि इन्हें टाला जा सकता है, या पहले ही सुलझाया जा सकता है लेकिन ऐसा होता नहीं।

पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

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Source - संदीप द्विवेदी, इंडियन एक्सप्रेस