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दार्जिलिंग की अशांति

पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों में जो अशांति उत्पन्न हुई उसके लिए एक बड़ी हद तक राज्य सरकार ही जिम्मेदार मानी जाएगी। ममता सरकार को यह अच्छी तरह पता होना चाहिए था कि बांग्ला भाषा को अन्य भाषा भाषी क्षेत्रों में अनिवार्य करने के क्या नतीजे सामने आ सकते हैं? यह समझना कठिन है कि दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों के लोगों की अपनी भाषा नेपाली के प्रति संवेदनशीलता से परिचित होने के बावजूद इस तरह का कोई फैसला क्यों लिया गया कि राज्य के सभी स्कूलों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई अनिवार्य होगी? यदि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया जैसा कि बाद में स्पष्टीकरण दिया गया तो फिर यह साफ करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की ही है कि ऐसी गफलत क्यों हुई? भाषा को लेकर राज्य सरकार की ओर से जो तथाकथित अनावश्यक निर्देश जारी किए गए उसका दुष्परिणाम यह हुआ कि अलग गोरखालैंड राज्य की दशकों पुरानी मांग नए सिरे से सामने आ गई।

खराब बात यह हुई कि इस मांग को लेकर सड़कों पर उतरे लोगों से निपटने के मामले में भी राज्य सरकार ने संवेदनशीलता का परिचय देना जरूरी नहीं समझा। फिलहाल यह कहना कठिन है कि गोरखालैंड की मांग कर रहे लोगों पर पुलिस की ओर से गोली चलाई गई या नहीं, लेकिन इतना तो है ही कि किसी न किसी स्तर पर हिंसा हुई और उसमें कई लोग हताहत भी हुए।

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Source - दैनिक जागरण

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