सैक्स शिक्षा में पोर्न की अहम भूमिका

porn education

समाज में स्मार्टफोन, टैबलेट जैसे आधुनिक संचार उपकरणों की बढ़ती उपलब्धता, सस्ते व आसानी से उपलब्ध इंटरनेट के साथ ही इंटरनेट के जरिए पोर्न सामग्री की किशोरों व युवाओं तक पहुंच का मुददा भी उठ रहा है। इसको लेकर तरह तरह की चिंताएं व आशंकाएं जताई जा रही हैं। इस क्षेत्र में अध्ययन करने वाली व द पोर्न फैक्टर कार्यक्रम की प्रस्तोता मरी क्रैब का मानना है कि हमारे समाज में पोर्न सामग्री का सांस्कृतिक अस है जिसकी ज्यादा समय तक अवेहलना नहीं की जा सकती। उन्होंने पोर्न सामग्री का इस्तेमाल यौन या सैक्स शिक्षा के लिए करने की वकालत की है।

मरी ने इस बारे में गार्डियन में एक लेख लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि पोर्न बड़ा कारोबार है। एक अनुमान के अनुसार पोर्न उद्योग को सालाना लगभग 25 अरब डालर का मुनाफा होता है। इंटरनेट के कुल इस्तेमाल की बात की जाए तो 30 प्रतिशत इस्तेमाल केवल पोर्न सामग्री आदि के लिए होता है।

उन्होंने कहा है कि भले ही हम खुद पोर्न सामग्री, फिल्में आदि नहीं देखते पढते हों लेकिन अपनी व्यापकता, अपनी प्रकृति तथा इसके असर को देखते हुए हमें इस पर ध्यान देना होगा क्योंकि हम इसकी इसकी अनदेखी नहीं कर सकते। यह बात अनेक अभिभावक, स्कूल, परामर्शक व नीति नियंता भी मानने लगे हैं।

अपने अध्ययन के हवाले से मरी ने बताया है कि पोर्न सामग्री में किसी तरह की आक्रामकता व हिंसा, विशेषकर महिलाओं के प्रति होती है। यानी पोर्न फिल्मों या इससे जुड़ी अन्य सामग्री में महिला भागीदार या चरित्र ही निशाने पर रहता है और 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में उसके प्रति हिंसक व्यवहार दिखाया जाता है। यह शारीरिक या शाब्दिक हो सकता है। मरी ने अपनी बात के समर्थन में इस उद्योग में काम करने वालों की राय, अध्ययनों का निष्कर्ष दिया है।

इसमें उन्होंने यह बताने की कोशिश की है कि सिर्फ मनोरंजन और फंतासी से इतर पोर्नोग्राफी उन सांस्कृतिक हालात में भी योगदान करती हैं जिनमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा को स्वीकार्य या इच्छित माना जाता है। मरी के अनुसार आनलाइन की दुनिया के साथ साथ बड़े हो रहे युवाओं की पोर्न तक पहुंच सामान्य बात है और वे भी इसे सामान्य रूप में लेने लगे हैं लेकिन उन्हें और बेहतर गाइडेंस मिलनी चाहिए।

उन्होंने लिखा है कि पोर्न से जुड़े मुददे उन लोगों के लिए चुनौती है जो कि युवाओं के साथ रहते या काम करते हैं। ये हमारे राजनेताओं के लिए भी चुनौती है। हमें अपने युवाओं का समर्थन करना चाहिए कि वे मीडिया द्वारा सैक्स, आक्रामकता व महिला पुरुष भेद के बारे में गढ़ी जा रही छवियों की आलोचना करें और जो सम्मानजनक, साझा आनंद व सहमति पर आधारित शारीरिक व मानसिक रिश्तों की उम्मीद करें।

मरी क्रैब का पूरा लेख यहाँ पढ़ें।

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Source - मरी क्रैब, गार्डियन