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शौचालय क्रांति

toiletfield भारत ही नहीं चीन सहित अनेक देशों में शौचालयों की कमी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। सरकारों के साथ-साथ अन्य सामाजिक संगठन इस दिशा में काम कर रहे हैं। बड़ी संख्या में शौचालय बनाए जा रहे हैं और इसमें बड़ा पैसा लगाया जा रहा है। खुले में शौच से होने वाली बीमारियों के साथ साथ अन्य सामाजिक दिक्कतों के प्रति लोग सचेत हुए हैं। प्रोजेक्ट सिंडीकैट में इस विषय पर बियोर्न लोमबोर्ग की एक रपट प्रकाशित हुई है जिसका शीर्षक है ‘द टायलेट रेवूलेशन’ यानी शौचालय क्रांति।

कोपनहेगन से प्रकाशित इस रपट में लोमबोर्ग ने लिखा है कि राजनेता व परोपकारी काम करने वाले प्राय: काल्पनिक और ऊँची-ऊँची बाते करते रहते हैं जैसे कि संवाद के जरिए सततता व परिवर्तन लाना। ऐसे में बिल गेट्स व भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की जानी चाहिए कि वे एक अधिक सांसारिक लेकिन महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। यह विषय है—शौचालय।

इसके अनुसार बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन चाहता है कि शौचालय प्रौद्योगिकी में आमूल-चूल बदलाव हो ताकि शौचालयों के कोई बड़ा बुनियादी ढांचा जरूरी नहीं रहे जैसे कि मलमूत्र प्रणाली या जल शोधन संयंत्र आदि। साल 2011 में गेट्स फाउंडेशन ने अपना ‘रिइनवेंट द टायलेट चैलेंज’ शुरू किया। इसके जरिए मानव मल के सुरक्षित व टिकाउ प्रबंधन के लिए लिए नवोन्मेषी उपायों के लिए अनुदान दिया जाता है। उम्मीद यही की जा रही है कि 21वीं सदी में टायलेट या शौचालय मानव मल को उर्जा, उर्वरक में बदलेंगे या जो पानी होता है उसे पीने योग्य बनाया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने शौचालयों के निर्माण को मंदिर बनाने से अधिक महत्वपूर्ण करार दिया है। उन्होंने खुले में शौच के चलन को 2019 तक समाप्त करने के लिए अभियान शुरू किया है। वह महात्मा गांधी का 150वाँ जयंती वर्ष होगा। इस लक्ष्य को रखते हुए मोदी सरकार तेजी से शौच आदि की मूल सुविधाएं खड़ी कर रही है और देश भर में लाखों शौचालय बनवाए जा रहे हैं। इसके तहत हर स्कूल में कम से एक शौचालय बनवाना भी शामिल है।

रपट के अनुसार इस मोर्चे पर भारत के प्रयास पड़ोसी चीन से मिलते जुते हैं। चीन भी देश भर में शौचालय बनवा रहा है  विशेष रूप से अपने पर्यटन उद्योग की मदद के लिए। इसे ही ‘शौचालय क्रांति’ कहा जा रहा है। चाइना नेशनल टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन का कहा है कि उसने 2015 में विभिन्न पर्यटन स्थलों के आसपास 14,320 शौचालय बनवाए हैं।

इसके अनुसार नीति निर्माता इस मुद्दे पर ध्यान देकर सही हैं। पर्याप्त साफ सफाई नहीं होना या यूं कहें कि गंदगी, विकास के सामने प्रमुख चुनौती है।

टॉयलेट क्रांति पर पूरा आलेख यहाँ पढ़ें।

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Source - बियोर्न लोंबर्ग, प्रोजेक्ट सिंडीकैट