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मशीनें भी करती हैं रंगभेद?

The top 10 finalists pose in their evening gowns during the 2012 Miss USA pageant, Sunday, June 3, 2012, in Las Vegas. (AP Photo/Julie Jacobson)

क्या मानव निर्मित मशीनें भी रंगभेद करती हैं? इन दिनों इस विषय पर बहुत गहरी बहस छिड़ी हुई है। दरअसल मुनष्य धीरे धीरे सारे काम अल्गोरिदम को सौंप रहा है या नियंत्रण उसके हवाले करता जा रहा है। वह सोशल मीडिया हो या अदालती कामकाज, मशीनों या एल्गोरिदम का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। ऐसे में उनके बनाने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। मशीनों के सीखने या काम करने का आधार वहीं आंकड़े होते हैं जो कि मनुष्य एकत्रित करता है और अगर ध्यान नहीं दिया जाए तो इन मशीनों में भी अपने सृजकों के गुण अवगुण आ जाते हैं। यानी उन्हें बनाने वालों के आग्रह, पूर्वाग्रह या दुराग्रह इन मशीनों में भी दिखने लगते हैं।

डेव गर्शगोन ने इस विषय पर एक आलेख क्वार्त्ज में लिखा है। इसमें उन्होंने एक सौंदर्य प्रतियोगिता ब्यूटी डॉट एआई का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है कि कई बार पूर्वाग्रहों का पता लगाना मुश्किल होता है लेकिन बाकी समय इसे उतनी आसानी से ही पहचाना जा सकता है जितना कि किसी के चेहरे पर लगी नाक को। यह सौंदर्य प्रतियोगिता ब्यूटी डॉट एआई यूथ लेबोरेटरीज ने आयोजित की और इसमें छह लाख प्रविष्टियाँ ली गईं। भागीदारों से कहा गया कि उनकी प्रविष्ठियों को नंबर कृत्रिम या आभासी समझ, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) द्वारा दिए जाएंगे। एल्गोरिदम प्रतिभागी के चेहरे पर झुर्रियों, समरूपता, चेहरे पर निशान आदि, नस्ल व उम्र आदि के हिसाब से नंबर देगा। लेकिन ऐसा लगता है कि इसमें नस्ल सबसे अधिक प्रभावी पैमाना रहा क्योंकि 44 विजेताओं में से 36 श्वेत थे।

यानी आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस (AI) या यूं कहें कि मशीनों ने रंगभेद बरता।

इस प्रतियोगिता को जज करने के लिए अपनाए गए टूल या प्रणाली गहरे तंत्रिका नेटवर्क पर आधारित थे जो कि आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस का मिश्रण है और विशाल डेटा संग्रहण के आधार पर काम करती है। इस मामले में एल्गोरिदम को हजारों या लाखों की संख्या में फोटो दिखाए गए। ऐसे फोटो जिनमें कुछ चहरों पर झुर्रियां थीं और कुछ में नहीं। एल्गोरिदम धीरे धीरे चेहरों पर झुर्रियों के विभिन्न मामलों या रूपों में समानताओं को सीख जाती है और नयी फोटो में पहचानने लगती है। लेकिन एल्गोरिदम अगर प्रथम दृश्या श्वेत लोगों की तस्वीरों से सीखती है तो अश्वेत चेहरे के मामले में उसकी सटीकता उतनी नहीं रहती। अन्य एल्गोरिदम में अन्य विशेषताओं या लक्षणों के मामले में भी ऐसा होता है।

ब्यूटी डॉट एआई के मुख्य विज्ञान अधिकारी एलेक्स जावोरोनकोव ने कहा,’ऐसा लग रहा है कि मशीन की दृष्टि में रंग मायने रखता है।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जनसमूहों के लिए पर्याप्त संख्या में डेटा नमूनों की कमी रही थी। यह फर्म ऐसी एक प्रतियोगिता अक्तूबर में फिर करवाने जा रही है।

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Source - डेव गर्शगोन, क्वार्त्ज

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7 September 2016