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शिवा थापा: रियो के लिए कड़ी मेहनत व जुनून

शिवा थापा 56 किलो भारवर्ग में रियो ओलंपिक के योग्य साबित होने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज़ बने। शिवा का यह दूसरा ओलंपिक है। विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाले शिवा 2012 में लंदन ओलंपिक में मुक़ाबला करने वाले सबसे युवा मुक्केबाज़ थे।

दरअसल शिवा ने वहीं से शुरुआत की जहां उनके बड़े भाई गोबिंद थापा ने छोड़ दिया था। गोबिंद असम के राज्य स्तरीय पदक विजेता मुक्केबाज़ रहे। छह भाई-बहनों में सबसे छोटे शिवा थापा के पिता पदम थापा गुवाहाटी में कराटे प्रशिक्षक रहे हैं।

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दरअसल शिवा थापा का मुक्केबाज़ी में पदार्पण अचानक ही हो गया। हुआ यूँ कि उनके पिता को लगा कि कराटे में प्रशिक्षण से शिवा ओलंपिक तक नहीं पहुँच पाएँगे तो उन्होंने उसे मुक्केबाज़ी के रिंग में उतारने का फै़सला किया।

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शिवा थापा का मुक्केबाज़ी में प्रवेश धमाकेदार रहा। उन्होंने एशियन ओलंपिक क्वालीफायर मैचों में स्वर्ण पदक जीता। यहां उन्होंने विश्व चैंपियन को मात दी और सीधे लंदन ओलंपिक का टिकट कटा लिया।

इससे पहले शिवा ने विश्व युवा चैंपियनशिप तथा युवा ओलंपिक गेम्स, सिंगापुर में रजत पदक जीता था। साल 2013 में वे सबसे युवा व तीसरे भारतीय मुक्केबाज़ बने जिन्होंने जोर्डन की राजधानी अम्मान में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही वे वर्ल्ड सीरीज़ बॉक्सिंग में विदेशी फ्रेंचाइज़ी USA टीम से जुड़ने वाले पहले भारतीय बने।

[संजीव श्रीवास्तव एडिटरप्लैटर के संस्थापक, संपादक व बीबीसी इंडिया के पूर्व संपादक हैं।]

 

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Source - एडिटरप्लैटर डैस्क