बुर्कीनी प्रतिबंध से सामने आया फ्रांस की धर्मनिरपेक्षता का पाखंड

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फ़्रांस में बुर्कीनी पर प्रतिबंध को लेकर खासा बवाल मचा हुआ है। इसको लेकर अलग अलग राय सामने आ रही है। फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं द्वारा समुद्री तटों पर पहने जाना वाला यह परिधान यानी बुर्कीनी ‘फ्रांस के खिलाफ युद्ध कर रहे आतंकवादी आंदालनों के प्रति निष्ठा का प्रतीक’ है। वहीं उदारवादी इसे महिलाओं की आजादी का उल्लंघन मान रहे हैं। अल्जीरियाई ब्रितानी वीडियो पत्रकार इमान अमरानी का मानना है कि फ्रांस में बुर्कीनी पर प्रतिबंध से उसकी धर्मनिरपेक्ष छवि का पाखंड सामने आ गया है।

अमरानी ने इस मुद्दे पर गार्डियन में एक लेख लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है— इन गर्मियों में उन्होंने देखा कि फ्रांस में किस तरह से मुस्लिम महिलाओं द्वारा समुद्री तटों, बीचों पर पहने जाने वाले परिधान यानी बुर्कीनी को लेकर किस तरह का विवाद खड़ा हो गया है। इस क्रम में भूमध्य सागर के आसपास के अनेक शहरों में बुर्कीनी पर प्रतिबंध लगा दिया गया तो कान में एक महिला पर सिर्फ इसलिए 11 यूरो का जुर्माना लगा दिया गया क्योंकि उसने बीच में सिर्फ स्कार्फ बांध रखा था और लेगिन पहनी थी। हाल ही में फोटो आईं कि नीस में फ्रांसीसी पुलिस ने एक एक महिला को बुर्कीनी उतारने को कहा। प्रधानमंत्री मेन्युएल वेल्स ने मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ इस तरह की पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया है। वे पहले भी इसके समर्थन में बयान दे चुके हैं।

लेख के अनुसार यह लड़ाई का नया मैदान है जहां फ्रांस की मुस्लिम महिलाओं को अपनी इच्छाओं का गला इसलिए घोंटना पड़ रहा है क्योंकि वे सरकारी नीतियों व सोच से मेल नहीं खातीं। वह भी ऐसी सरकार जो कि अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा का दावा करती है। फ्रांस में स्कूलों में हिजाब व बुर्के पर प्रतिबंध है। छात्राओं की स्कर्ट की लंबाई को लेकर भी नियम हैं। अब वहां ‘बुर्कीनी’ पर प्रतिबंध लगाया गया है।

अमरानी का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं से फ्रांस की जीवन शैली को कथित खतरे फ्रांसीसी मीडिया व राजनेताओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। इनमें से अनेक ने तो फ्रांसीसी मूल्यों विशेषकर धर्मनिरपेक्षता से इस्लाम के बेमेल को लेकर चिंताएं जताई है। इस बारे में बिना किसी तथ्य या आंकड़ों के, सामान्य सी बातें कही जा रही हैं।

क्या है बुर्कीनी : ‘बुर्कीनी’ एक तरह का स्विम सूट है जिससे शरीर पूरी तरह से ढक जाता है। ये खासतौर से उन मुस्लिम महिलाओं के लिए बनाया गया था जो समुद्र में बिकिनी जैसे कपड़े नहीं पहन पाती हैं। बुर्का और बिकनी को मिलाकर इसका नाम बुर्किनी रखा गया।

दरअसल अहेदा जेनेटी मुस्लिम फैशन डिजाइनर अहेदा जेनेटी ने मुस्लिम महिलाओं की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए बुर्कीनी डिजाइन की थी। यह हमेशा से राजनीतिक मुद्दा बनी रही है। बुर्किनी पहनने के बाद महिला सिर से लेकर पैर तक ढक जाती हैं। सिर्फ उसका चेहरा खुला रहता है। 2009 में फ्रांस में एक महिला ने सबसे पहले बुर्किनी पहनी थी। वह बुर्कीनी पहनकर समुद्र पर गईं और चर्चा में आ गईं। इसके बाद इस मुस्लिम परिधान पर काफी बवाल मचा था। स्पेन, पुर्तगाल, ऑस्ट्रेलिया, इटली और अमरीका में बुर्कीनी पर प्रतिबंध है।

अमरानी का पूरा आलेख यहाँ पढ़ें।

 

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Source - इमान अमरानी, गार्डियन