हिटलर के प्रचार मंत्री की सचिव ने कहा: हमें कुछ पता नहीं था

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दुनिया भर में तानाशाहों का तानाशाह रहा एडोल्फ हिटलर। उनका प्रोपगेंडा या प्रचार मंत्री था जोसेफ गोएबल्स। गोएबल्स का मानना था कि किसी भी झूठ को 100 बार अगर जोर से बोला जाए तो वह अंतत: सच लगने लगता है। यानी झूठ को इतनी बार दोहराओ की वह सच लगने लगे। खैर गोएबल्स की सचिव रही ब्रुनहिल्डे पोम्ज़ेल का एक साक्षात्कार गार्डियन में प्रकाशित हुआ है।

अपने साक्षात्कार में ब्रुनहिल्डे पोम्ज़ेल ने गोएबल्स की नीतियों, कार्यप्रणाली आदि के बारे में पूछे जाने पर कहा,’अब कोई विश्ववास नहीं करेगा, लेकिन मैं कुछ भी नहीं जानती।’

पोमसेल के जीवन पर एक फिल्म बन रही है। वे नाजी सरकार की प्रोपगेंडा मशीन के केंद्र में थी।

अपने साक्षात्कार में ब्रुनहिल्डे पोम्ज़ेल एक मार्के की बात कही है,’जो लोग आज कहते हैं कि वे नाजियों के खिलाफ खड़े हो जाते तो मैं मानती हूं कि वे वास्तव में अपनी प्रतिबद्धत को लेकर गंभीर है लेकिन मेरा विश्वास करें.. इनमें से ज्यादातर ऐसा नहीं करते।’ उन्होंने कहा है,’नाजी पार्टी के उदय के बाद ऐसा लग रहा था कि पूरा देश ही एक तरह के जादू के घेरे में है।

पोम्ज़ेल के जीवन का यह पहला व आखिरी विस्तृत साक्षात्कार है। वे इस समय 105 साल की हैं। पिछले साल उनकी आंखों की रोशनी चली गई। उन्होंने कहा कि उन्हें संतोष है कि उनके दिन गिने चुने बचे हैं। उन्होंने कहा ‘मेरा जो भी थोड़ा समय बचा है, मुझे उम्मीद है कि यह कुछ साल नहीं बल्कि कुछ महीने ही होगा। मैं तो बस इस उम्मीद से बंधी हूं कि दुनिया को उस तरह के उतार चढाव नहीं देखने पड़ें जो कि उसे तब देखने पड़े… हालांकि दुनिया में बहुत सी डरावनी घटनाएं हो रही हैं.. नहीं हो रही क्या? मुझे संतोष है कि मेरे कोई संतान नहीं जिसके बारे में मैं चिंता करूं।’

पोम्ज़ेल के साथ 30 घंटे के बातचीत पर आधारित फिल्म ए जर्मन लाईफ हाल ही में म्यूनिख फिल्म फेस्टीवल में रिलीज हुई। यह अलग बात है कि इस साक्षात्कार में पोमसेल ने अपने काम को लेकर खेद जैसी कोई भावना व्यक्त नहीं की।

पोम्ज़ेल नाजी सरकार के शीर्ष नेतृत्व के करीबी रहे लोगों में संभवत: अंतिम जीवित शख्सियत हैं। वे कुछ और सचिवों के साथ गोएबल्स के कार्यालय में काम करती थीं। लेकिन उनका कहना है कि गोएबल्स, उनके मंत्रालय, कामकाज और नीतियों की उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा,’हर किसी को लगता है कि हमें सबकुछ पता था। हमें कुछ भी पता नहीं था। सबकुछ गुप्त रखा जाता था।’

पूरा साक्षात्कार यहाँ पढ़ें।

 

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Source - केट कॉनली, गार्डियन