10 करोड़ में बिक गए थे जज और वकील! तब जाकर प्रजापति को मिली थी जमानत

यह ख़बर देश की न्याय प्रणाली को ही कटघरे में खड़ा करती है। जब जज और वकील ही बिकने लगेंगे तो जनता कहां न्याय मांगने जाए…? मामला यूपी के पूर्व मंत्री और सपा नेता गायत्री प्रजापति से जुड़ा हुआ है। एक रेप केस के आरोपी प्रजापति को 25 अप्रैल को बड़ी ही आसानी से जमानत मिल गई। लेकिन जब प्रजापति को मिली जमानत की गहन जांच-पड़ताल की गई तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दिलीप बी भोसले ने प्रजापति को जमानत मिलने की जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रजापति की जमानत 10 करोड़ रुपये में फाइनल हुई थी। इसमें से पांच करोड़ रुपये प्रजापति को जमानत देने वाले पोक्सो जज ओपी मिश्रा और उनकी पोस्टिंग संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली कोर्ट में करने वाले जिला जज राजेंद्र सिंह को दिए गए थे, जबकि इतने ही पैसे इस मामले में बिचौलिये की भूमिका अदा कर रहे तीन अन्य वकीलों को भी दिए गए थे।

गायत्री प्रजापति

इतना ही नहीं जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अतिरिक्त जिला और सेसन जज ओपी मिश्रा को 7 अप्रैल को उनके रिटायर होने से ठीक तीन सप्ताह पहले ही पोक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) जज के रूप में तैनात किया गया था। अपनी गोपनीय रिपोर्ट में जस्टिस भोसले ने कहा है कि 18 जुलाई 2016 को पोक्सो जज के रूप में लक्ष्मी कांत राठौर की तैनाती की गयी थी और वह काफी अच्छा काम कर रहे थे। लेकिन उन्हें अचानक से हटाने और उनके स्थान 7 अप्रैल 2017 को ओपी मिश्रा की पोस्को जज के रूप में तैनाती के पीछे कोई औचित्य या उपयुक्त कारण नहीं था। यानी ओपी मिश्रा की नियुक्ति नियमों की अनदेखी करते हुए की गई थी।

बहरहाल राजेंद्र सिंह को पदोन्नत कर हाईकोर्ट में तैनात करने की तैयारी थी। लेकिन इस घूसकांड के उजागर होने के बाद कोलेजियम ने उनका नाम वापस ले लिया है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में राजेंद्र सिंह से पूछताछ भी की गई है।

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Source - एडिट प्लैटर