IS आ​तंकियों के लिए ‘स्वर्ग’ बन सकता है दक्षिण-पूर्व एशिया

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विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण पूर्व एशिया आने वाले दिनों में इस्लामिक स्टेट के उन आतंकवादियों के लिए ‘स्वर्ग’ साबित हो सकता है जो कि सीरिया या इराक से लौटना चाहेंगे। कैनबरा, आस्ट्रेलिया से डेविड इग्नेशियस ने इस बारे में वॉशिंगटन पोस्ट में एक रपट भेजी है। इसमें विशेषज्ञों के हवाले से यह बताने की कोशिश की गई है कि दक्षिण पूर्व एशिया विस्थापित IS आतंकियों के लिए ‘स्वर्ग’ साबित हो सकता है।

रपट के अनुसार इस्लामिक स्टेट, IS को दक्षिण पूर्व एशिया की मुसलिम बहुल जनसंख्या से आतंकवादी नियुक्त करने में अधिक सफलता अब तक नहीं मिली है। लेकिन जब सीरिया व इराक में ‘खलीफाओं के गढ़’ ढह जाएंगे और इंडोनेशिया, मलेशिया व फिलीपींस जैसे देशों के सैकड़ों आतंकवादी घर वापसी की कोशिश करेंगे?

इसके अनुसार आस्ट्रेलिया में विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की चुनौती एक क्षेत्रीय समस्या है न कि महज पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका का कोई संताप। उनका मानना है कि संभावित सबसे भीषण नया चरण अभी आगे आना है जबकि जिहादी नये क्षेत्रों में पैर रखने या जमाने की कोशिश करेंगे।

इसके अनुसार दक्षिण पूर्व एशिया की सरकारें कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर निगरानी रखने तथा उन्हें विफल करने के लिए गुपचुप तरीके से अमरीका के साथ काम कर रही हैं। कुछ तो दशक भर से एक तरह के गठजोड़ में हैं और उन्हें काफी सफलता भी मिली है। अमरीका ने इंडोनेशिया में एक पुलिस बल ‘डिटेचमेंट 88’ को प्रशिक्षण में मदद की। इस पुलिस बल ने अलकायदा से जुड़े जेम्मा इस्लामिया को एक तरह से नेस्तनाबूद कर दिया जो कि 2002 में बाली बम विस्फोटों के लिए जिम्मेदार था और जिनमें 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

हालांकि रपट में आशंका जताई गई है कि दक्षिण पूर्व एशिया की जेलें, झुग्गियां व युवा गैंग, ऐसा माहौल देते हैं जहां आतंकवाद नये सिरे से पनप सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीरिया में इस्लामिक स्टेट, आईएस से जुड़े आतंकवादियसों ने इस तरह के संभावित ठिकानों पर पहुंचने की कोशिश की है जहां संभावित जिहादी मिल सकते हैं। विशेषज्ञों ने इस लिहाज से जकार्ता में जनवरी में हुए बम विस्फोटों का जिक्र किया है जिनमें आठ लोग मारे गए। आईएस ने इन विस्फोटों की जिम्मेदारी ली थी।

पूरी रपट यहाँ पढ़ें।

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Source - डेविड इग्नेशियस, वॉशिंगटन पोस्ट