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जागरूकता फैलाने के लिए बच्चे छापते हैं अखबार बालकनामा

india street kids

बालकनामा। यह एक अखबार का नाम है जो दिल्ली में सड़कों आदि पर जीवन यापन करने वाले बच्चे छापते हैं। इस अखबार का उद्देश्य बच्चों से होने वाले अन्याय, उत्पीड़न की कहानियां होती हैं ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके।

अलजज़ीरा में शौकत शफ़ी ने इस बारे में एक फोटो फीचर लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि भारत में सड़कों पर जीवन यापन करने वाले बच्चों के जीवन की कहानी.. यौन उत्पीड़न,  नशीले दवाओं का आदत और ठगों व पुलिसवालों के हाथों अत्याचार जैसे कुछ ही शब्दों में बयां की जा सकती है। बालकनामा, बच्चों की आवाज में सड़कों पर जीवन यापन करने वाले या स्ट्रीट चिल्ड्रन अपने जैसे बच्चों के दुख दर्द को प्रकाशित करते हैं।

इस अखबार बालकनामा का संपादक 17 साल का शंभू है जो कि दिन में आजीविका कमाने के लिए कारें धोता है। शंभू ने अलजज़ीरा से कहा,’यह अखबार हमारी आवाज है लोगों को यह बताने के लिए हमारे साथ क्या होता है, हमें क्या क्या भुगतना पड़ा है और कि हमारी जिंदगी भी मायने रखती है।’

उन्होंने कहा,’सड़कों पर रहने वाले बच्चों से मारपीट हो या बलात्कार या वह गायब हो जाएं … किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई हंगामा नहीं होता है।’

इस अखबार में चार मुख्य संवाददाता व 64 संवाद संग्राहक हैं जो इधर उधर जाकर खबरें जुटाते हैं। इन्हें बातूनी कहा जाता है। ये लोग कहानियां या खबरें खुद नहीं लिख पातें तो मुख्य संवाददाताओं को बताते हैं जो उन्हें शाब्दिक जामा पहनाते हैं।

पूरी रपट यहाँ पढ़ें।

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Source - शौकत शफी, अलजजीरा

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9 September 2016