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बारिशों को साल भर सहेज कर रखने की जुगत

Rain clouds are seen above a pond formed after the ridge to valley water harvesting approach was implemented in Dewas, Madhya Pradesh India, on Monday, July 4, 2016. *** SECOND SENTENCE HERE. Photographer: Prashanth Vishwanathan/Bloomberg

मध्यप्रदेश के देवास जिले में वर्षा जल के संचयन के लिए 4000 से अधिक मानव निर्मित तालाब या जलाशय हाल ही के वर्षों में बनाए गए हैं। इन तालाबों या जलाशयों ने देवास जिले किसानों की मानों तकदीर ही बदल दी है। अब देवास माडल को देश के बाकी हिस्सों में भी आजमाने की बात हो रही है। अर्चना चौधरी ने ब्लूमबर्ग में इसी विषय पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है।

इसमें उन्होंने एक किसान प्रेम सिंह खींची का हवाला दिया है जिन्होंने इसी तरह के जलाशय की मदद से अपनी सूखी शुष्क जमीन को सरसब्ज बना दिया है। वे बारिश का पानी इस तरह के जलाशय में इकट्ठा करते हैं और एक साल में तीन तीन फसलें ले रहे हैं। इससे उनका जीवन और जीवन स्तर ही बदल गया है। खेती के लिए बारिश के पानी पर निर्भर रहने वाले किसानों के लिए प्रेम सिंह खींची की कहानी एक उदाहरण है। प्रेम सिंह उन चुनींदा किसानों में से एक हैं जिन्होंने एक जिला अधिकारी के कहने पर दशक भर पहले इस दिशा में कदम उठाया था।

रपट में कहा गया है कि भारत जहां खेती का एक बड़ा हिस्सा मानसून की बारिश पर निर्भर है वहां इस तरह के प्रयोग क्रांतिकारी हो सकते हैं। मध्यप्रदेश के देवास जिले में ही इस समय 4000 से अधिक मानवनिर्मित जलाशय है।

रपट में ग्रामीण विकास मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारी अमरजीत सिन्हा के हवाले से कहा गया है कि भारत देवास माडल को अब देश भर में दोहराना चाह रहा है। योजना मार्च 2017 तक देश भर में 12 लाख ऐसे जलाशय बनाने की है जिनकी संख्या फिलहाल 5,00,000 है। हालांकि इस दिशा में काम तो मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले ही शुरू हो गया था लेकिन मोदी सरकार ने इस पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है और मजबूत लक्ष्य तय किए हैं। इस पहल का मूल उद्देश्य यही है कि बारिश के जल को सहेजा जाए ताकि उसका इस्तेमाल साल भर हो।

पूरी रपट यहाँ पढ़ें।

 

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Source - अर्चना चौधरी, ब्लूमबर्ग

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8 September 2016