अब भी ‘मेड इन चाइना’ है दुनिया का आर्थिक विकास

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चीन की अर्थव्यवस्था में कथित नरमी को लेकर अनेक टीका टिप्पणियों के बावजूद विश्व जीडीपी वृद्धि में चीनी अर्थव्यवस्था का योगदान सबसे अधिक हैं। यानी दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि में चीन का अकेले का हिस्सा सबसे बड़ा है।

न्यू टाइम्स में वित्तीय सेवा फर्म मोर्गन स्टेनली के पूर्व चेयरमैन स्टीवन रोच ने अपने एक आलेख में चीन के इस योगदान को महत्वपूर्ण बताते हएु कहा है कि मामूली गति के साथ लंगड़ाकर चल रही विश्व अर्थव्यवस्था के लिए यह बहुत मायने रखती है जो कि किसी बड़े झटके का सामना करने के लिए लगभग तैयार नहीं है।

इसके अनुसार सरकार के आधिकारिक लक्ष्य के अनुसार अगर 2016 में चीन की जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत रहती है तो वैश्विक जीडीपी वृद्धि में उसका योगदान 1.2 प्रतिशत होगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष इस साल वैश्विक वृद्धि केवल 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगा रहा है। इसमें चीन का हिस्सा 39 प्रतिशत होगा।

रपट के अनुसार विश्व अर्थव्यवस्था में चीन का यह योगदान अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के योगदान को बौना कर देता है। उदाहरण के लिए मजबूत सुधार के लिए सराहे जा रहे अमरीका की जीडीपी वृद्धि दर 2016 में सिर्फ 2.2 प्रतिशत रहने की अपेक्षा है। यह दुनिया की कुल जीडीपी वृद्धि में केवल 0.3 प्रतिशत योगदान होगा। विश्व अर्थव्यवस्था में चीन के योगदान की तुलना में यह केवल एक चौथाई ही रहेगा।

इसके अनुसार यही हालात कमोबेश यूरोप के हैं। वहीं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में भी कोई भी देश विश्व अर्थव्यवस्था में चीन के योगदान के करीब नहीं है। भारत की जीडीपी वृद्धि इस साल 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो कि चीन से 0.8 प्रतिशत अधिक तेज होगी। लेकिन क्रय शक्ति समता के आधार पर गणना करें तो वैश्विक उत्पादन में चीन का योगदान 18 प्रतिशत है जो कि भारत के 7.6 प्रतिशत हिस्से की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।

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Source - स्टीवन रोच, न्यू टाइम्स