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इतने लाचार क्यों होते हैं हमारे शिशु?

BY EP HINDI DESK | PUBLISHED: 8 September 2016

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प्रजाति के रूप में हम मानव, अविश्वसनीय रूप से स्मार्ट हैं। हम कहानियां सुनाते हैं, अद्भुत कला और विस्मित करने वाली प्रौद्योगिकी बनाते हैं, शहर बनाते हैं और अंतरिक्ष में जीवन की खोज करते हैं। भले ही इस धरती पर हम अनेक प्रजातियों से बहुत बाद में आए हों लेकिन अनेक मामलों में हम दूसरों से कहीं अधिक निपुण या पूर्ण हैं। हमें उन्हें खाते हैं, लेकिन वे हमें नहीं खाते। यहां तक कि हम उन पर वैज्ञानिक अध्ययन, प्रयोग करते हैं और विलुप्त हो गई प्रजातियों को फिर बनाने की सोच रहे हैं। लेकिन हमारी सारी बुद्धिमता के साथ एक रोचक प्रतिरोध या विरोधाभास जुड़ा हुआ है: हमारे बच्चे, शिशु सबसे लाचारया सबसे निरीह क्यों होते हैं?

सोचिए कि जिराफ का बच्चा जन्म के एक घंटे में ही खड़ा हो सकता है। यहां तक की जीवन के पहले ही दिन दौड़ने लगता है। बंदर का बच्चा अपनी रक्षा व पोषण के लिए अपनी मां को कसकर पकड़ लेता है या एक तरह से लटक जाता है। वहीं मानव का बच्चा अपना सिर तक सही ढंग से नहीं संभाल सकता। तो हमारे यानी मानव बच्चे इस लिहाज से सबसे नालायकहुए। लेखिका मारिया कोनिकोवा ने न्यूयॉर्कर में एक आलेख में यह सवाल उठाते हुए पड़ताल करने की कोशिश की है।

इसमें उन्होंने मानव बुद्धिमता के विकास का जिक्र करते हुए यूनिवर्सिटी आफ रोचस्टर में काम कर रही एक विज्ञानी का हवाला दिया है। बरसों से काम करते करते वह औसत बच्चे की जटिलता (sophistication) को लेकर बहुत प्रभावित हुई हैं। लेकिन जब नवजात शिशुओं का मामला आता है तो उन्हें काफी लाचारी नजर आती है: कि वे किसी क्षण तो इतने अयोग्य, नकारा और अगले ही क्षण इतने योग्य या उज्ज्वल कैसे हो सकते हैं? एक दिन उन्होंने अपने सहयोगी स्टीवन पियांतादोसी के समक्ष भी यह सवाल रखा। उन्होंने बताया,’हम मानव शिशुओं की इस लाचारी को कैसे उचित ठहराया जा सकता है?’

उन्होंने लेखक को बताया,’यहां तक कि अन्य नवजात शिशु जैसे कि शिशु चिंपाजी जो कि विकास क्रम में हमारे बहुत करीब है, अपनी मां के चिपट सकता है।इस तरह से उन्हें विरोधाभास दिखता है कि मानव शिशु जन्म लेते समय काफी लाचार होता है किसी भी अन्य जीव शिशु की तुलना में… लेकिन जल्द ही हम बहुत तेजी से स्मार्ट होने लगते हैं बाकी जीव शिशुओं की तुलना में कहीं तेजी से। अगर यह विरोधाभास नहीं होता तो?’

इस मुद्दे पर पूरा आलेख यहाँ पढ़ें।

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Source - मारिया कोनिकोवा, न्यूयॉर्कर

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8 September 2016