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एपल, कर और करामात

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आयरलैंड में एपल के कर मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक आलेख में लिखा है कि भले ही एपल व अमेरिका ‘बेईमानी का रोना रो रहे’ हों लेकिन इस हालत के लिए वे खुद ही जिम्मेदार हैं।

अखबार ने एक आलेख में 2013 में सीनेट की एक रपट के हवाले से लिखा है कि एपल कम से कम एक दशक से किसी न किसी तरह से कर से बचने में संलिप्त रही है। इसमें कंपनी द्वारा आयरलैंड में बिना कोई कर चुकाए 100 अरब डालर की कमाई करना भी शामिल है। इसके अनुसार वहीं कंपनी यानी एपल की अक्खड़ता देखो कि वह ऐसा मानती दिख रही है कि आयरलैंड जैसे कर पनाहगाह देश में उसके समझौते कभी अवैध करार नहीं दिए जाएंगे। जबकि यूरोपीय नियामक स्टारबक्स, अमेजन, फिएट व जर्मन रसायन कंपनी बासफ जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ इसी तरह के मामलों में कड़ी कार्रवाई कर चुके हैं।

इसके अनुसार अमरीकी बहुराष्ट्रीय कंपनियां जब विभिन्न रूपों में कर बचाव की गतिविधियों में संलिप्त थीं तो कांग्रेस हाथ पर हाथ धरे बैठे रही। इसके अनुसार कर में चकमा देने का यह काम मुख्य रूप से स्थगन के रूप में हुआ जिसमें अमरीकी कंपनियां विदेश में कमाए गए लाभ पर कर चुकाने को तब तक टाल सकती हैं जब तक कि वह राशि वापस घर नहीं आती।

आलेख के अनुसार शुरू में, उक्त कर स्थगन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए एक सुविधा थी क्योंकि वे वे विदेशों में निवेश के अवसर चाहती थीं। लेकिन आज, यह वैश्विक कर बचाव की मुख्य जड़ बन गया है। वित्तीय इंजीनियरिंग का कमाल है कि अमरीकी कंपनियां अपना मुनाफा विदेशी खातों में डाल सकती हैं और वे इस धन को स्वदेश वापस लाने के लिए कर दरों में कटौती हेतु कांग्रेस में लाबिंग करती हैं।

आलेख में एपल और आयरलैंड कर मामले के मद्देनजर अमरीकी कंपनियों, कांग्रेस यानी संसद की भूमिका की पड़ताल करने की कोशिश की गई है।

यहां उल्लेखनीय है कि यूरोपीय संघ ने प्रमुख अमरीकी टेक्नोलॉजी कंपनी एपल को बड़ा झटका देते हुए उसे आयरलैंड में 13 अरब यूरो टैक्स के रूप में चुकाने को कहा है। यूरोपीय संघ ने इस अमरीकी कंपनी को लगभग कोई टैक्स नहीं चुकाने की अनुमति देने वाले सभी अनुबंध को अवैध करार दिया है। यूरोपीय संघ ने अपने फैसले में कहा है कि आयरलैंड सरकार के साथ समझौतों के तहत एपल इस क्षेत्रीय आर्थिक समूह में अपने लगभग सारे लाभों पर टैक्स दायित्व से बची रह गई. हालांकि आयरलैंड ने कहा है कि वह यूरोपीय संघ के इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा. माना जा रहा है कि एपल भी इसे चुनौती देगी.

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Source - संपादकीय, न्यूयॉर्क टाइम्स