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ज़मीन का अभिशाप

Curseoftheland3उच्चतम न्यायालय द्वारा सिंगूर भूमि अधिग्रहण को खारिज किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि समूचे देश में औद्योगिकीकरण के भविष्य को लेकर नये तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। ये सवाल विशेष रूप से विभिन्न औद्योगिक  परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर हैं। ओपन मैग्जीन ने इसी विषय पर एक रपट प्रकाशित की है।

रपट में उच्चतम न्यायालय के फैसले का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इससे उन किसानों को राहत मिलेगी जिनकी जमीन नैनो परियोजना के लिए ली गई थी। इस फैसले का मतलब ळै कि किसानों को उनकी जमीन वापस मिलेगी। हालांकि इससे देश के समक्ष मौजूदा एक बड़ी समस्या पर भी रोशनी पड़ी है और वह है कि देश में औद्योगिक वृद्धि को कैसे बल दिया जाए और कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर कैसे सृजित हों।

माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद सलीम ने ओपन मैग्जीन से कहा कि इस फैसले के बाद एक नये तरह का संकट सामने आने वाला है। उन्होंने कहा,’अब 1894 के कानून के तहत अधिगृहीत सारी जमीन पर सवाल किया जा सकता है। इस तरह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से यह औद्योगीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित करेगा, विशेषकर पश्चिम बंगाल जैसे उन राज्यों में जहां जमीन की कमी है।’

रपट के अनुसार सिंगूर की चिंगारी वहीं नहीं थमी बल्कि इसका देशव्यापी असर हुआ। पश्चिम बंगाल में ढाई दशक तक राज करने वाली वाममोर्चा सरकार, सत्ता से बेदखल हो गई और तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी। इसके बाद 2013 में केंद्र सरकार ने 1894 के कानून की जगह नया भू अधिग्रहण विधेयक पेश किया। नया कानून उचित मुआवजे का अधिकार तथा जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास व बहाली में पारदर्शिता कानून , 2013 के रूप में आया।

रपट में इस कानून में मौजूदा राजग सरकार के कार्यकाल में किए गए बदलाव, प्रस्तावित औद्योगिक गलियारों व स्मार्ट शहर परियोजनाओं तथा भूमि अधिग्रहण की दिक्कतों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

उल्लेखनीय है कि इसी अगस्त के आखिर में उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 2006 में सिंगूर में भूमि अधिग्रहण को रद्द कर दिया। तत्कालीन वाममोर्च सरकार ने यह जमीन टाटा के नैनो संयंत्र के लिए अधिग्रहित की थी। उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के सिंगूर में टाटा नैनो संयंत्र के लिए भूमि अधिग्रहण को उचित ठहराने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर यह नया फैसला सुनाया और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में खामियां पाई। इसके साथ ही न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को आदेश दिया कि 12 सप्ताह के भीतर किसानों को उनकी जमीन लौटाई जाए। इस बीच खबरें हैं कि 14 सितंबर को सिंगूर उत्सव मनाया जाएगा और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सिंगूर के किसानों को उनकी जमीन लौटाना चाहती हैं. रपटों के अनुसार 14 सितंबर को मुख्यमंत्री 14 किसानों को उनकी जमीन के कागजात देंगी, जबकि 15 कृषकों को जमीन के बदले मुआवजा दिया जायेगा।

पूरी रपट यहाँ पढ़ें।

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Source - उल्लेख एनपी व सिद्धार्थ सिंह, ओपन मैग्जीन

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12 September 2016