ताजा समाचार

इस माटी के सूरज!

sakshi malik

हरियाणा की छोरियों ने खेलों में जो धमाल मचाया हुआ है वह अविश्वसनीय है। हैरान करने वाला है। रियो ओलंपिक में साक्षी मलिक ने इस राज्य की उन लड़कियों की सपनों को नये पंख लगा दिए हैं जो कि खेलों में हाथ आजमाकर परंपरागत, रूढीवादी सोच को टक्कर देना चाहती हैं। आउटलुक पत्रिका में प्रज्ञा सिंह ने साक्षी मलिक की जीत और हरियाणा में सोच पर एक आलेख में कहा है कि इस राज्य की लड़कियों व उनके परिवारों को खाप जैसी रूढ़िवादी बेड़ियों से निकलने का जरिया मिल गया है।

उन्होंने लिखा है— हरियाणा की 23 साल की साक्षी रियो में कांस्य पदक के लिए अपने किर्गिस्तानी प्रतिद्वंद्वी से लड़ रही थी। वहीं हजारों मील दूर हरियाणा में यह मैच देख रही उसकी सहेली और साथी पहलवान सुमन कुंडू का दिल जोरों से धड़क रहा था। वह साक्षी के समर्थन में चिल्ला रही थी, रो रही थी जो कि उसके परिवार के लिए नई बात थी। कुंडू ने कहा,’जीती तो साक्षी, लेकिन मुझे लगा मैं जीत गई।’ सुमन कुंडू 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीत चुकी है।

कुंडू का साक्षी मलिक की जीत में इस तरह शामिल होना उनके व्यक्तिगत संबंधों को भी रेखांकित करता है जो कि लड़की होने के कारण उन्हें समान स्तर पर ले आता है। इसकी कई वजह हैं कि सुमन को साक्षी की जीत भी कहीं न कहीं अपनी लगती है। हरियाणा का पुरुष प्रधान समाज जहां महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों की दर उंची है, जहां बेटे को वरीयता दी जाती है जहां दहेज एक बड़ी समस्या है वहां साक्षी जैसी लड़कियां व उनकी सफलता लड़कियों के लिए उम्मीदों के नये पंख लेकर आई हैं।

इस रपट के अनुसार यह समाज ही लड़कियों के खेलों में आने के खिलाफ नहीं है व्यवस्था भी उनके समर्थन में नहीं। खेलों में आने वाली लड़कियों को अनेक तरह के मानसिक शोषण का शिकार होना पड़ता है। लोगों के ताने होते हैं तो सीमित संसाधन वाले मां बाप की मजबूरियां। मेद्दीपुर, कुरूक्षेत्र की हॉकी खिलाड़ी गुरनैल कौर कहती है,’हमने यह परवाह करनी छोड़ दी कि लोग क्या कहते हैं। अगर हम सुनेंगे तो हमारी प्रगति रुक जाएगी।’ हम आगे नहीं बढ़ पाएंगी।

इसमें उन्होंने लिखा है कि रियो में साक्षी के कांस्यपदक जीतने से इस प्रदेश में लड़कियों पर सामाजिक बंदिशें शायद थोड़ी कम हों। उसकी जीत खाप व्यवस्था के मुंह पर भी एक करारा तमाचा है और यह खेलों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर पिछड़ी सोच रखने वालों के लिए एक सबक है। उन्होंने लिखा है कि साक्षी ने भले ही कांस्य पदक जीता हो लेकिन हरियाणा की बाकी लड़कियों के लिए यह खरे सोने से कम नहीं है।

पूरा लेख यहाँ पढ़ें।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटरपर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App

Source - प्रज्ञा सिंह, आउटलुक